भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की 2 मार्च को लखनऊ में होने वाली महारैली के बाद चुनावी संग्राम की जमीनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया जाएगा।
इसमें चुनाव प्रचार से लेकर मतदान केंद्र्र पर लोगों को पहुंचाकर उनका वोट डलवाने तक की तैयारियां शामिल होंगी। पार्टी प्रत्याशियों का लोगों से सीधे जुड़ाव हो सके, इसके लिए क्षेत्रवार टास्क पेपर भी तैयार कराया जाएगा।
यह टास्क पेपर प्रत्याशियों के साथ-साथ चुनाव प्रचार के लिए जाने वाले नेताओं और जिला स्तरीय चुनाव संचालन समितियों को भी दिया जाएगा, जिससे चुनाव प्रचार में स्थानीय मुद्दे या समस्याओं की अनदेखी न हो।
लोगों से सीधे संवाद व संपर्क तथा अन्य तैयारियों पर नजर रखने के लिए प्रदेश मुख्यालय पर नियंत्रण कक्ष बनाया जाएगा।
बनेंगी कमेटियां
महारैली के बाद प्रदेश में चुनावी इंतजामों के मद्देनजर लगभग 15 कमेटियां बनाने का प्रस्ताव है। ये कमेटियां नेताओं के दौरों से लेकर मुद्दों तक फैसला करेंगी।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के रणनीतिकारों ने गुजरात की तर्ज पर चुनावी संग्राम की तैयारियों को अंतिम रूप देने की योजना बनाई है।
माना जाता है कि गुजरात में अलग-अलग क्षेत्रों की समस्याओं, राजनीतिक व सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर पार्टी की रीति-नीति बनाने की वजह से वहां भाजपा का स्थानीय स्तर पर जुड़ाव बढ़ा है।
पार्टी के नेता स्थानीय फीडबैक के आधार पर जब लोगों के बीच बोलते हैं तो भाषण में स्थानीय पुट होने के कारण लोगों का ज्यादा जुड़ाव होता है।
नियंत्रण कक्ष व बूथ तक संचार तंत्र
गुजरात के फॉर्मूले पर बूथ तक की जानकारी के आदान-प्रदान के लिए नेटवर्क भी स्थापित किया जाएगा। इसका संचालन प्रदेश मुख्यालय पर स्थापित नियंत्रण कक्ष के जरिये होगा।
इसी कक्ष से चुनावी तैयारियों की मॉनिटरिंग भी की जाएगी। नेताओं के दौरों, क्षेत्र की तात्कालिक समस्याओं और जरूरतों की जानकारी ली जाएगी।
चुनाव के दौरान किसी तात्कालिक स्थिति से निपटने का काम भी इसी नेटवर्क से जानकारी जुटाकर काम किया जाएगा।
सोशल मीडिया पर भी चलेगा संग्राम
महारैली के बाद सोशल मीडिया पर मोर्चा संभालने के लिए जिलेवार टीमें गठित की जाएंगी। ये टीमें फेसबुक, ट्विटर व यू ट्यूब पर आने वाली सूचनाओं पर नजर रखने के साथ ही पार्टी पर लगने वाले आरोपों का जवाब भी देंगी।
सामाजिक समीकरणों पर भी नजर
सामाजिक समीकरणों के मद्देनजर भी जिला से लेकर प्रदेश तक टीमें बनेंगी। इनमें क्षेत्रवार प्रभावी लोगों को शामिल कर उन्हें अलग-अलग लोगों के बीच भेजा जाएगा।
वे अपने लोगों के बीच जाकर भाजपा के लिहाज से सामाजिक समीकरणों को ठीक करने के प्रयास करेंगे। साथ ही जरूरत के अनुसार, प्रदेश स्तरीय लोगों का सहयोग लेने के बारे में निर्णय करेंगे।
डैमेज कंट्रोल का भी इंतजाम
पार्टी की नजर डैमेज कंट्रोल पर भी है। जिलाध्यक्षों से पहले ही कहा जा चुका है कि वे अपने-अपने जिले में इस सिलसिले में लोगों के ग्रुप बना लें।
इसमें भाजपा ही नहीं, बल्कि संघ परिवार के सभी संगठनों और पूर्व पदाधिकारियों में से ऐसे लोगों को छांटकर रखा जाए जिनका कार्यकर्ताओं में सम्मान हो।