दो मई को जिला पंचायत सदस्य चुनाव के अपेक्षित परिणाम नहीं आने से विपक्षी दलों ने प्रदेश सरकार से लेकर संगठन तक को आरोपों के कटघरे में खड़ा कर सत्ता विरोधी माहौल बनाना शुरू कर दिया। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच आए जिला पंचायत सदस्य के परिणाम से बिगड़े माहौल को सुधारने की कमान खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभाली। योगी ने एक ओर जहां मंडलों का दौरा कर कोरोना संक्रमण का प्रबंधन किया वहीं संगठन के साथ मिलकर जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की कमान संभाली।
संगठन की दो साल से तैयारी रंग लाई
भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव जीतने के लिए दो साल पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। जिला पंचायत सदस्य चुनाव के लिए दो साल पहले ही क्षेत्रीय और जिला प्रभारी तैनात कर दिए गए थे। उसके लिए बूथ समितियों को प्रशिक्षण भी दिया गया। पार्टी ने चुनाव में भाई-भतीजवाद और परिवारवाद को दूर करने के लिए किसी भी मंत्री, विधायक या पार्टी पदाधिकारी के परिजन को टिकट नहीं देने के निर्णय को सख्ती से लागू किया।
जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में भले ही पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन भाजपा 680 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई। उसके बाद भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में 65 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखकर चुनावी रणनीति बनाई। जिला पंचायत सदस्य का चुनाव कम जीतने के बाद भी जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के लिए भाजपा के टिकट की दौड़ लगी। एक-एक जिले के लिए स्थानीय जातीय समीकरण के हिसाब से तय की गई भाजपा का रणनीति सफल रही। इसके लिए प्रदेश प्रभारी राधामोहन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, प्रदेश महामंत्री सुनील बंसल ने पूरे प्रदेश का दो बार दौरा किया।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की जीत से सरकार और संगठन के रणनीतिकार उत्साहित हो सकते हैं लेकिन उन्हें विधानसभा चुनाव की तैयारी में 2010 और 2015 के जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के नतीजों से सबक लेकर ही आगे बढ़ना होगा। 2010 के पंचायत चुनाव में बसपा को रिकॉर्ड जीत मिली थी लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा का सफाया हो गया था। वहीं, 2015 के पंचायत चुनाव में सपा ने 63 जिलों में कब्जा जमाया था लेकिन 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सपा 47 सीट पर सिमट गई थी।
राठौर का कद बढ़ा
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में मिली जीत से भाजपा के प्रदेश महामंत्री जेपीएस राठौर का भी कद बढ़ा है। जिला पंचायत सदस्य चुनाव में मिली हार के बाद भाजपा ने राठौर को जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया था। राठौर पश्चिम क्षेत्र के प्रभारी भी हैं। पश्चिम में भाजपा को 14 में से 13 जिलों में जीत मिली है। खुद प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने राठौर की पीठ थपथपाई। इससे पहले राठौर 2017 विधानसभा, 2019 लोकसभा चुनाव सहित सभी चुनावों में चुनाव प्रबंधन के प्रभारी रहे हैं।