यूपी से सीटें बढ़ाने की चिंता से जूझ रही भाजपा ने पूर्वांचल में फिर से कमल खिलाने की कोशिश शुरू कर दी है।
इसके लिए शनिवार से इस इलाके में बैठकों व प्रशिक्षण का सिलसिला शुरू हो रहा है। बैठकों में स्थानीय कार्यकर्ताओं से उन संकटों के बारे में बातचीत होगी, जिनके कारण पार्टी की स्थिति खराब हुई है।
प्रशिक्षण में कार्यकर्ताओं के साथ इन संकटों से निजात के उपायों पर विचार-विमर्श होगा और कामकाज के तौर-तरीकों की जानकारी दी जाएगी।
प्रदेश के लिए बनी भाजपा चुनाव प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. रमापति राम त्रिपाठी शनिवार को गोरखपुर जा रहे हैं। वह पूर्वांचल में तीन दिन रहेंगे। शनिवार को वे गोरखपुर में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे।
इसके अगले दिन 8 सितंबर को देवरिया और 9 सितंबर को मऊ में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ उनकी बैठकें होंगी। अगले साल होने वाला लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए नाक का सवाल बन गया है।
लगभग दस साल से सत्ता से बाहर भाजपा के नेताओं को लग रहा है कि इस बार दिल्ली की सत्ता पर उनका कब्जा हो सकता है। उन्हें यह भी पता है कि इस बार अगर चूके तो फिर लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
यूपी से ही उम्मीद: भाजपा के नेताओं को यह बात अच्छी तरह पता है कि दिल्ली में सरकार बनाने का सपना पूरा करने के लिए यूपी से सीटों की संख्या बढ़ाना पहली शर्त है। इसलिए पार्टी के रणनीतिकारों का ध्यान उन इलाकों पर फोकस हो गया है जहां पहले कभी कमल ही कमल खिलता रहा है। पूर्वांचल का इलाका भाजपा के लिए बेहद उम्मीदों वाला रहा है।
इस इलाके में इलाहाबाद, वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर, राबर्ट्सगंज, जौनपुर से लेकर देवरिया, कुशीनगर, गोरखपुर, बांसगांव, बस्ती, संतकबीरनगर सहित कई सीटों पर पार्टी का झंडा फहरा चुका है, पर इस समय इस इलाके में सिर्फ चार सीटें गोरखपुर, बांसगांव, आजमगढ़ व वाराणसी ही भाजपा के पास हैं। पार्टी नेताओं को उम्मीद है कि मेहनत करके इन सीटों पर फिर भाजपा का कब्जा हो सकता है।