उप्र. को-ऑपरेटिव फेडरेशन (पीसीएफ) के सभापति पद पर भाजपा के वाल्मीकि त्रिपाठी और उप सभापति पद पर रमाशंकर जायसवाल निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। मंगलवार को हुए सभापति और उप सभापति के चुनाव के बाद पीसीएफ पर भी भाजपा का कब्जा हो गया।
पीसीएफ के चुनाव में भाजपा ने सभापति पद के लिए वाल्मीकि त्रिपाठी और उप सभापति पद के लिए रमाशंकर जायसवाल को प्रत्याशी घोषित किया था। पीसीएफ की प्रबंध समिति के सभी 11 सदस्य भाजपा से होने से दोनों पदों के लिए एक-एक प्रत्याशी ने ही नामांकन किया। नाम वापसी का समय बीतने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने वाल्मीकि त्रिपाठी को सभापति और रमाशंकर जायसवाल को उप सभापति निर्वाचित घोषित किया। गौरतलब है कि पीसीएफ सभापति पद पर पर दस वर्ष से पूर्व मंत्री शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव काबिज थे।
विनोद जैन पीसीएफ के संचालक नियुक्त
सरकार ने मुजफ्फर नगर के विनोद कुमार जैन को पीसीएफ प्रबंध समिति का मनोनीत सदस्य नियुक्त किया है।
इफ्को और कृभको के प्रतिनिधि भी चुने गए
पीसीएफ के सभापति और उप सभापति निर्वाचित होते ही इफ्को और कृभको के प्रतिनिधि भी चुने गए। वाल्मीकि त्रिपाठी को इंडियन फॉर्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लि. (इफ्को) नई दिल्ली, रमाशंकर जायसवाल को कृषक भारती को-ऑपरेटिव लि. (कृभको) नई दिल्ली, राकेश गुप्ता को भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) नई दिल्ली, पुरुषोत्तम पांडेय को भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ लिमिटेड नई दिल्ली, रामबहादुर सिंह को सेंट्रल वेलफेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड नई दिल्ली, अमरनाथ को इंडियन टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन नई दिल्ली और आनंद किशोर द्विवेदी को नेशनल फिल्म को-ऑपरेटिव लि. नई दिल्ली का प्रतिनिधि चुना गया।
भाजपा दफ्तर में हुआ स्वागत
पीसीएफ के नवनिर्वाचित सभापति और उप सभापति का भाजपा प्रदेश मुख्यालय पहुंचने पर सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, महामंत्री संगठन सुनील बंसल और यूपीसीएलडीएफ के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार तिवारी ने स्वागत किया। सभापति और उप सभापति ने भी उन्हें अवसर प्रदान करने के लिए जेपीएस और बंसल का आभार जताया।
सरकार और संगठन की रणनीति रंग लाई
उप्र. को-ऑपरेटिव फेडरेशन (पीसीएफ) के सभापति और उप सभापति पर मिली जीत के साथ ही पहली बार भाजपा का सहकारिता पर पूरी तरह कब्जा हो गया है। सहकारिता के क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाने की सरकार और संगठन की लंबी रणनीति के बल पर यह संभव हो सका है। प्रदेश में 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पहली बार दो तिहाई बहुमत से बनी भाजपा सरकार ने 2018 की शुरुआत से ही सहकारिता में पैर जमाने की तैयारी शुरू कर दी थी। तय रणनीति से सहकारी समितियों में पहले अपने कार्यकर्ताओं को सदस्य और फिर पदाधिकारी मनोनीत और निर्वाचित कराया गया। प्रदेश में करीब 7500 सहकारी समितियां है इनके एक करोड़ से अधिक सदस्य है। 2018 में पीसीएफ को छोड़कर सभी प्रमुख समितियों पर भाजपा का कब्जा हो गया था। मंगलवार को पीसीएफ पर भी भाजपा काबिज हो गई।