क्वीन मेरी अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ प्रो. रेखा सचान का कहना है कि शिक्षा व साक्षरता के बढ़ते स्तर से लोगों की सोच बदली है। बेटियों की अहमियत बढ़ी है। बेटियों की पढ़ाई शादी आदि खर्चों के डर से लोग बेटियां हीं चाहते थे। अब कन्या विद्या धन, सुकन्या समृद्धि योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी सरकारी योजनाओं के चलते माता-पिता बेटियों के जन्म पर चिंतित नहीं होते।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम (पीसीपीएनडीटी) के नोडल अफसर डॉ. राजेंद्र कुमार चौधरी का कहना है कि लिंग पता करने को लेकर सख्ती और कई अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों को सील किए जाने से लोगों में भ्रूण हत्या को लेकर डर पैदा हुआ है।भ्रूण हत्या रोकने के लिए जांच केंद्रों पर पंजीकरण, मशीन का रिकॉर्ड, मरीजों के संपूर्ण रिकॉर्ड, रेडियोलॉजिस्ट का पूरा ब्योरा व उसका साइन समेत छोटी-छोटी चीजों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसका सकारात्मक असर देखने को
मिला है।