फैजी कहते हैं कि 3 करोड़ मुर्गे उत्तर प्रदेश में तैयार किए जाते हैं। इसमें से एक करोड़ लखनऊ का हिस्सा हैं। प्रति 3000 मुर्गों की देखभाल के लिए एक कर्मचारी लगा होता है, यानी उसका पूरा परिवार संकट में है। उत्तर प्रदेश पोल्ट्री फेडरेशन में मुर्गी पालकों की संख्या 1000 से अधिक हैं। एक-एक कारोबारी 25-30 लाख लगाकर तैयारी करता है और इस वक्त सबकुछ दांव पर लगा है।
पंजाब-हैदराबाद से मंगाते थे माल, फिलहाल बंद कर दिया
कारोबारी रफीक कहते हैं कि कानपुर में प्रतिबंध की खबर आते ही चारों तरफ हड़कंप मचा है। बिक्री बंद नहीं है, हम लोग पंजाब और हैदराबाद से अंडा मंगाते थे, अब मंगाना बंद कर दिया है, जो रखा है उसे खपा दें बस।
नॉनवेज कारोबारी रहनुमा कुरैशी कहते हैं कि मछली हो या मटन या फिर चिकन या अन्य मांस, जब कोई आफत आती है तो सभी पर आती है। हालांकि मटन-मछली खाया जा रहा है, लेकिन मांग सबकी गिरी है। 14 तक मुस्लिम सहालग है, इसके बाद रही सही मांग भी खत्म हो जाएगी।
फिश पार्लर पर उतनी ही मांग
शाज आलम एलडीए रोड पर अपना फिश पार्लर चलाते हैं। कहते हैं कि मछली की मांग जैसी थी, उतनी ही है, उस पर किसी तरह का कोई फर्क नहीं है।