फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टीचर्स के सामने भड़ास निकाल सकेंगे स्टूडेंट्स, सीक्रेट रखा जाएगा नाम

Sat, 23 Jul 2016 03:14 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
विज्ञापन
डेमो
विज्ञापन
लखनऊ यूनिवर्सिटी में अब स्टूडेंट्स के तनाव का स्तर मापने के बाद उनकी काउंसलिंग की जाएगी, ताकि वे उसे कम कर अपना ध्यान पढ़ाई पर लगाकर कॅरिअर पर फोकस कर सकें।
विज्ञापन


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देश पर गुरुवार को विवि के मनोविज्ञान विभाग में इसके लिए बायोफीडबैक लैब और स्टूडेंट्स काउंसलिंग सेंटर का उद्घाटन किया गया। 

बायोफीडबैक लैब का उद्घाटन होने पर सबसे पहले कुलपति प्रो. एसबी निमसे का स्ट्रेस लेवल मशीन के माध्यम से मापा गया। फिलहाल राजधानी में कुछ ही बायोफीडबैक लैब हैं। 
विज्ञापन


जल्द ही इसका विस्तार किया जाएगा, ताकि बाहर के लोगों को भी लाभ पहुंचाया जा सके। विभागाध्यक्ष प्रो. पल्लवी भटनागर ने बताया कि इस सेंटर के उद्घाटन के साथ ही  शिक्षकों को काउंसलिंग के लिए प्रशिक्षित करने की कार्यशाला भी शुरू हो गई है। 

सभी विभागों से एक महिला और एक पुरुष शिक्षक को शामिल किया गया है। शिक्षक अपने विभागों में स्टूडेंट्स की उत्कंठा, चिंता, तनाव, फेल होने के भय आदि को काउंसलिंग के माध्यम से दूर करेंगे। 

साथ ही गोपनीयता भी बनाए रखेगा। यदि किसी स्टूडेंट की समस्या का समाधान विभाग स्तर पर नहीं होगा तो उसे काउंसलिंग सेंटर भेजा जाएगा।

जहां जरूरत पड़ने पर उसके तनाव का स्तर मापने के साथ देखा जाएगा कि उसका अपनी बॉडी पर कितना नियंत्रण है। छात्राओं की काउंसलिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
विज्ञापन

युवाओं में सबसे बड़ा तनाव बेरोजगारी

कुलपति प्रो. एसबी निमसे - फोटो : amar ujala
इस अवसर पर कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने कहा कि मॉडर्न लाइफ स्टाइल में यूथ काफी तनाव में है। अभिभावक भी बच्चों पर दबाव बढ़ा रहे हैं, जिसका नतीजा खतरनाक रूप में सामने आ रहा है।   युवाओं में सबसे बड़ा तनाव बेरोजगारी या योग्यता से कम स्तर की नौकरी करना है। प्रो. निमसे ने इसके लिए शिक्षण संस्थानों को दोषी बताया। स्टूडेंट्स का तनाव दूर करने में यह लैब और काउंसलिंग सेंटर काफी मददगार होगा।

कार्यक्रम के दौरान डीन आर्ट्स प्रो. बीके तिवारी, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. अनिल शुक्ला शिक्षिका डॉ मानिनी श्रीवास्तव मौजूद रही। लैब का उद्घाटन होने के बाद सबसे पहले कुलपति प्रो. एसबी निमसे को मशीन पर बैठाया गया।
  शुरू में उनके तनाव का स्तर ऊंचा मिला। यह तनाव स्क्रीन पर ग्राफ के सहारे दिखने के साथ लाल रंग की पट्टी से झलक रहा था, वहीं हरे रंग की पट्टी उनके तनाव के कम होने का संकेत दे रही थी। 

इसके अलावा दूसरी कंप्यूटर स्क्रीन पर एक विजुअल चल रहा था, जिसमें कुछ बतखें पानी में तैर रही थीं। तनाव अधिक होने पर यह स्थिर रहती है।   डेमो के दौरान जल्द ही कुलपति ने खुद पर नियंत्रण करना शुरू किया तो तनाव का स्तर कम होने लगा और लाल पट्टी छोटी होने के साथ हरी पट्टी बढ़ गई। और बत्तखें बतखों चहचहाते हुए तैरने लगी। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें