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बायो गैस प्लांट : कचरे से कमाई, गैस किल्लत की हुई विदाई, हर महीने लाखों की हो रही बचत

Thu, 26 Mar 2026 11:56 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya आशीष गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ

सार

कारोबारी चंदन गुप्ता ने बताया कि बायोगैस ने लागत में भारी कटौती की है। वर्तमान में इस क्षमता के प्लांट की कीमत करीब 20-25 लाख रुपये है। इससे उन्हें रोजाना पांच से छह व्यावसायिक सिलिंडर के बराबर गैस मिल रही है।
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मिठाई कारोबारी चंदन गुप्ता की सफेदाबाद स्थित डेयरी में लगा बायो गैस प्लांट। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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गैस की किल्लत के बीच बायो गैस प्लांट अब उद्यमियों के लिए मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं। शहर के कुछ प्रमुख कारोबारी पशुपालन और कचरा प्रबंधन के जरिये न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि हर महीने लाखों रुपये की बचत भी कर रहे हैं।

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हालांकि, गोबर की आसान उपलब्धता न होना कुछ प्लांट के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में अगर गोशालाओं में प्लांट लग सके तो गैस की आधी किल्लत दूर हो सकती है। 

मिठाई कारोबारी चंदन गुप्ता। - फोटो : amar ujala
मिठाई कारोबार में गोबर से बनी आत्मनिर्भरता
मिठाई कारोबारी चंदन गुप्ता आठ वर्षों से बायो गैस का सफल उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सफेदाबाद स्थित अपनी डेयरी में कामधेनु योजना के तहत शुरुआत में 50-60 गायें रखी थीं, जिनकी संख्या अब 300 पार कर गई है। इन्ही गायों के गोचर और अन्य कार्बनिक पदार्थों के जरिये संचालित बायो गैस प्लांट से उन्हें रोजाना पांच से छह व्यावसायिक सिलिंडर के बराबर गैस मिल रही है।

चंदन गुप्ता ने बताया कि उनका आधा काम प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। इससे दूध गर्म करने और खोया ओटने जैसे भारी काम आसानी से हो जाते हैं। इसके अलावा, इसी गैस से छोटा जनरेटर भी चलाया जाता है। हालांकि, चाट पकौड़ी जैसे तेज आंच वाले काउंटरों के लिए अब भी एलपीजी की जरूरत पड़ती है, लेकिन बायोगैस ने लागत में भारी कटौती की है। वर्तमान में इस क्षमता के प्लांट की कीमत करीब 20-25 लाख रुपये है।

गोबर की कमी, बंद करना पड़ा प्लांट
गत्ता फैक्ट्री चलाने वाल बंधरा के उद्यमी गौरव भाटिया का अनुभव अलग है। बताया कि उन्होंने बायो गैस प्लांट लगाया था, लेकिन गोबर की उपलब्धता न होने से तीन साल पहले इसे बंद करना पड़ा। गौरव के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों से गोबर मंगवाना कठिन और खर्चीला काम है। मांग बढ़ने पर रेट तय होने के बावजूद समय पर उपलब्धता नहीं हो पाता। इसी किल्लत से उन्हें बायोगैस छोड़कर वापस एलपीजी और इलेक्ट्रिक व्यवस्था पर शिफ्ट होना पड़ा।
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गोशालाओं में लगे प्लांट तो न हो किल्लत

मिठाई कारोबारी अविनाश त्रिपाठी - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व मिठाई कारोबारी अविनाश त्रिपाठी बताते हैं कि शहरी लोगों के पास गोबर या बायो गैस जैसे प्लांट लगाने में सबसे बड़ी समस्या जगह की है। ऐसे में अगर हर ब्लॉक की सभी गोशालाओं में एक प्लांट भी लग सके तो इन गोशालाओं से निकलने वाले गोबर का उचित इस्तेमाल हो सकेगा और गैस संकट भी दूर हो सकेगा।

बता दें कि अभी अकेले लखनऊ में ही 85 गोशालाएं संचालित हैं, जिनमें से सिर्फ दो जगहों नगर निगम के कान्हा उपवन और बीकेटी के अकोरी गांव की गोशाला में ही गोबर गैस प्लांट लगा है।
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