सदनों का बहुमूल्य समय फालतू विषयों में नष्ट हो जाता है। इससे सदनों की सार्थक भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मुद्दे पर देश भर के विधायी निकायों के सचिवों ने चिंता जताई। इस मौके पर सदनों की प्रक्रियाओं व कार्यवाहियों को प्रभावी बनाने और जन सरोकारों से जोड़ने पर चर्चा की गई तो समाधानों की तलाश भी की गई।
ऐसे रोकी जा सकती है समय की बर्बादी: तेलंगाना की तरफ से सुझाव दिया गया कि व्यापक हितों से जुड़े विषयों वाले सवालों को स्वीकार करने को प्राथमिकता देकर सदनों का समय बचाने के साथ ही जन सरोकारों से भी जुड़ा जा सकता है।
यह सुझाव भी आया कि सदन में सार्थक प्रश्नों पर पूरक प्रश्न हों, इसलिए प्रश्नों को स्वीकार करने में सावधानी बरती जाए। इसके लिए प्रश्नों के लिए कुछ मानक तय किए जा सकते हैं।
प्रश्नों की संख्या सीमित हो जाए तो भी सदन में चर्चा के लिए ज्यादा वक्त मिल सकेगा। प्रश्न पूछने में सभी पक्ष के सदस्यों को बराबर अवसर देने की भी बात उठी।
तेलंगाना ने दिया महत्वपूर्ण सुझाव
तेलंगाना की तरफ से ही सुझाव आया कि उनके राज्य की तरह प्रतिदिन आधे सवाल सत्तापक्ष के सदस्यों व आधे विपक्ष के सदस्यों के स्वीकार कर इस काम को किया जा सकता है। एक सुझाव लॉटरी से प्रश्नों के चयन का भी आया।
ताकि सूचना के अधिकार की जरूरत ही न पड़े: सूचना के अधिकार की सीमा के सवाल पर ज्यादातर सचिवों ने सदन की कार्यवाही को ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन करने व पारदर्शी बनाने का सुझाव दिया।
कहा गया कि पूरी कार्यवाही इतनी पारदर्शी कर दी जाए कि सूचना के अधिकार की जरूरत ही न पड़े। यूपी विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे ने कहा कि प्रदेश विधानसभा सचिवालय इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
प्रश्नों को ऑनलाइन लेना शुरू हो गया है। नोटिसों के बारे में भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कार्यवाही भी ऑनलाइन की जा रही है।
कामकाज पेपर लेस बनाने की दी सलाह
राज्यसभा के महासचिव शमशेर के. शेरिफ व लोकसभा के महासचिव अनूप मिश्र ने भी सदनों की कार्यवाही को ज्यादा से ज्यादा पारदर्शी बनाने और उसे ऑनलाइन करने के साथ पूरे कामकाज को पेपरलेस बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
शेरिफ ने कहा कि यह काम धीरे-धीरे ही आगे बढ़ पाएगा। कारण, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से सवाल, सूचनाएं व नोटिस लेने में सबसे ज्यादा दिक्कत संबंधित व्यक्ति की पहचान है।
उदाहरण के लिए अगर मैसेज से हम कोई सूचना ले लें तो यह कन्फर्म करना मुश्किल है कि उसे सदस्य ने ही भेजा है या किसी और ने। इस बारे में कोई प्रक्रिया तय करने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला किया जा सकता है।