एसटीएफ से साझा करेंगे फोन नंबर : परीक्षा के पहले से बाद तक समस्त केंद्र व्यवस्थापकों, जिला स्तरीय अधिकारियों, कार्यदायी संस्था के कार्मिकों व आयोग के अधिकारियों के मोबाइल नंबर एसटीएफ के साथ साझा किए जाएंगे। इन सभी के नंबर सर्विलांस पर रखे जाएंगे।
लाइव मॉनिटरिंग : परीक्षा केंद्रों पर नकल रोकने के लिए सभी केंद्रों की सीसीटीवी के जरिए वीडियोग्राफी व लाइव मॉनिटरिंग की योजना है।
लागू होगा एसओपी : स्कैनिंग के दौरान ओएमआर शीट में बदलाव व हेराफेरी रोकने के लिए आयोग स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार कर रहा है। स्कैनिंग व स्कोर तैयार करने की प्रक्रिया में मानवीय व मशीनी त्रुटि को रोकने के लिए इसे समानान्तर रूप से अलग-अलग कार्यदायी संस्थाओं से कराने की योजना है।
ओएमआर का होगा मिलान अनंतिम चयन सूची के दो गुना अभ्यर्थियों की ओएमआर की कोषागार प्रतियां निकलवाकर प्राप्त स्कोर का मिलान भी कराने का प्रस्ताव है।
आयोग की लिखित परीक्षाओं के लिए चयनित कार्यदायी संस्थाओं द्वारा तीन स्तर की कार्यवाही की जाती है। पहला, प्रश्नपत्रों (ओएमआर सहित) की सेटिंग, प्रिंटिंग व उनका कोषागार तक परिवहन।
दूसरा, परीक्षा के दिन प्रश्नपत्रों को कोषागार से निकालकर परीक्षा केंद्रों पर ले जाना, परीक्षा का आयोजन कराना व परीक्षा के बाद मूल ओएमआर व अन्य प्रपत्रों को आयोग को उपलब्ध कराना। फिर ओएमआर की कोषागार प्रति को जिला स्तरीय कोषागार में रखना।
तीसरा, ओएमआर व संबंधित प्रपत्रों की स्कैनिंग व अभ्यर्थियों के स्कोर की गणना कर आयोग को उपलब्ध कराना।
इसके बाद आयोग अंतिम परीक्षाफल जारी कर संबंधित विभाग को चयन के लिए सिफारिश भेजता है। आयोग ने पालीवाल समिति के सुझावों पर अमल करते हुए इस प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करने की योजना बनाई है। इन कार्यों को अलग-अलग कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से समानान्तर रूप से गोपनीय ढंग से कराने का प्रस्ताव है। इससे यदि एक प्रश्नपत्र का कोई सेट लीक होता है तो दूसरे सेट के जरिए परीक्षा कराई जा सकेगी।