उद्यमी यदि अपने जीवनकाल में ही अपनी औद्योगिक संपत्ति उत्तराधिकारियों को हस्तांतरित करना चाहते हैं तो इसके लिए उन्हें कोई स्टांप शुल्क अदा नहीं करना पड़ेगा।
शासन में इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार हो रहा है। कैबिनेट से अनुमति लेकर उद्यमियों को यह सुविधा देने की तैयारी है।
प्रदेश में उद्यमी यदि अपनी जिंदगी में ही अपना कारोबार कानूनी तौर पर अपने बच्चों को सौंपना चाहें (नामांतरण) तो यह प्रक्रिया पूरी करने में स्टांप शुल्क देना पड़ता है। उद्यमी इसे अव्यावहारिक मानते रहे हैं।
उनका कहना है कि एक बार इंडस्ट्री के लिए परिसपंत्ति बनाने में स्टांप शुल्क अदा करने के बाद अपने जीते जी अपनी ही संपत्ति अपने परिवारीजनों को हस्तांतरित करने में दोबारा स्टांप शुल्क का औचित्य नहीं है।
सरकार उद्यमियों के इस तर्क पर सहमत नजर आ रही है। उद्यमियों को अपने जीवनकाल में अपनों को औद्योगिक संपत्ति नामांतरण में किसी तरह का स्टांप शुल्क न देना पड़े, इस संबंध में अंतर्विभागीय विचार-विमर्श शुरू हो चुका है।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विभागीय सहमति की कार्यवाही पूरी होते ही प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। अनुमति मिलते ही उद्यमियों की इस समस्या का समाधान हो जाएगा।