काशी विश्वनाथ मंदिर के चढ़ावे में बडे़ घोटाले खुलने वाले हैं। पता चला है कि कमिश्नर के आदेश पर कलेक्ट्रेट में खोले गए कार्यालय में संपत्ति और चढ़ावा के रिकॉर्ड पहुंचाने में कर्मचारियों के हाड़ इसलिए कांप रहे हैं कि उनमें करोड़ों की हेराफेरी की गई है।
सोने-चांदी के अलावा नगदी चढ़ावा, भोग, आरती और निर्माण के मद में लूटखसोट से पुजारियों, लिपिकों और सेवादारों ने करोड़ों रुपये की संपत्ति जुटाई है। मंदिर प्रबंधन से जुड़े तमाम कर्मचारियों की इस कदर तूती बोलती है कि उनको कोई मनचाही जगह से हटा नहीं सकता है।
उनमें से कई तो अफसरों की ट्रांसफार, पोस्टिंग की ताकत रखते हैं। सावन में भोग-प्रसाद, आरती की व्यवस्था तो इनके लिए कमाने का खास मौसम होता है।
श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे में बंदरबांट का सिलसिला पुराना है। देश के तमाम प्रसिद्ध मंदिरों में तो व्यवस्थाएं सुधार ली गई हैं।
मगर, विश्वनाथ मंदिर की हुंडियों की गिनती में जमकर हेराफेरी हो रही है। यह गोलमाल इस हद हो रहा है कि इस पर नियमित निगरानी के लिए जब रिकॉर्ड तलब किए गए तो 1983 में मंदिर के अधिग्रहण के बाद अब तक का रिकॉर्ड गायब कर दिया गया।
सिर्फ बाबा की संपत्तियों के अलावा चढ़ावे के रिकॉर्ड की जांच करा ली जाए तो यहां के गोलमाल की पोल खुल सकती है। नौ फरवरी, 2015 को हुई न्यास परिषद की बैठक में दान-चढ़ावा रजिस्टर बनाने का प्रस्ताव पहली बार लाया गया लेकिन उस पर भी अमल नहीं हुआ।