पता चला है कि वाराणसी में वर्ष 2011-12 के दौरान प्रशासनिक मद से संविदा पर कार्यरत मनरेगा कर्मियों के मानदेय भुगतान को प्राथमिकता देने की जगह ग्राम पंचायतों ने टेंट, कैमरा व अन्य सामानों की खरीद को प्राथमिकता दी।
वाराणसी के कमिश्नर चंचल कुमार तिवारी की ओर से कड़ी लिखा-पढ़ी के बावजूद वहां के कर्मियों को 2011-12 का मानदेय नहीं दिया जा सका।
मनरेगा तकनीकी सहायक/अवर अभियंता वेलफेयर एसोसिएशन के वाराणसी मंडल अध्यक्ष लालचंद सिंह चौहान बताते हैं कि 2010-11 के मार्च व 2011-12 के अप्रैल माह का 8000-8000 रुपये की दर से भुगतान वर्ष 2012-13 में किया गया।
बाकी भुगतान शासनादेश को दरकिनार कर 400 रुपये प्रति एमबी के आधार पर किया जा रहा है जिसे वह लोग स्वीकार नहीं कर सकते।
चौहान का कहना है कि वाराणसी के ही बड़ेगांव ब्लाक में मार्च 2011 से अप्रैल 2012 तक 8000 रुपये प्रतिमाह की दर से भुगतान किया गया, लेकिन जब वे लोग हाईकोर्ट चले गए तो वहां का भुगतान रोक दिया गया।
चौहान बताते हैं कि शासनादेश के अनुसार प्रशासनिक खर्च से सबसे पहले मानदेय का भुगतान किया जाना चाहिए, लेकिन वर्ष 2011-12 में उन लोगों का मानदेय रोककर टेंट, कैमरा, आलमारी, रेडियो व साउंड सिस्टम खरीद को प्राथमिकता दी गई।