गोरखपुर व फूलपुर उपचुनाव के नतीजों से साफ हो गया है कि यूपी में कांग्रेस के ‘एकला चलो’ के दिन अभी नहीं आए हैं। किसी न किसी गठबंधन में शामिल होने पर ही उसकी नैया पार लग सकती है। दोनों सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों की जमानत जब्त होने से उस पर लोकसभा चुनाव में कम सीटें लेकर भी गठबंधन करने का मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ गया है।
उपचुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट में माना कि यूपी में मतदाताओं में भाजपा के प्रति बहुत गुस्सा है, पर वे उस गैर भाजपाई उम्मीदवार के लिए वोट करेंगे, जिसके जीतने की संभावना सबसे ज्यादा हो।
कांग्रेस के लिए चिंता की बात यह है कि फूलपुर उपचुनाव में उसे लोकसभा चुनाव-2014 के मुकाबले एक-तिहाई वोट मिले, जबकि उस समय लोगों में कांग्रेस के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी इफैक्ट के कारण ज्यादा गुस्सा था। कमोबेश यही हाल गोरखपुर सीट पर भी रहा।
80 लोकसभा सीटों वाला यूपी किसी भी दल के लिए केंद्र में सरकार बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता स्वीकार करते हैं कि यहां कांग्रेस अकेले दम पर बेहतर प्रदर्शन करने की स्थिति में नहीं आ सकती।
हाईकमान को यह बात समझनी चाहिए कि आगामी लोकसभा चुनाव में गठबंधन ही कांग्रेस के लिए एकमात्र विकल्प है। वह यूपी में सपा व बसपा के लिए ज्यादा सीटें छोड़कर भी संख्याबल के लिहाज से यहां से लोकसभा चुनाव में मजबूत स्थिति में आ सकती है।