कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व में जल्द ही बड़े फेरबदल होंगे। निकाय चुनाव के नतीजों से हाईकमान खुश नहीं है। ऐसे में उच्च स्तर पर तय हुआ है कि जिन नेताओं को सजातीय सम्मेलन करने या सजातीय बड़े नेताओं को शामिल कराने की जिम्मेदारी दी गई थी और उन्होंने इसे ठीक से नहीं निभाया, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
सूत्र बताते हैं कि अहम जिम्मेदारी संभालने वाले कई पदाधिकारियों ने सांगठनिक कामकाज में कोई खास रुचि नहीं ली। कुछेक तो ऐसे भी हैं कि उन्होंने पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए एक भी सजातीय सम्मेलन नहीं करवाया। इतना ही नहीं एक भी सजातीय पूर्व विधायक या सांसद तक को पार्टी में शामिल नहीं करवा सके। जबकि इन पदाधिकारियों को जनाधार बढ़ाने की ही मुख्य जिम्मेदारी दी गई थी।
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कुछ पदाधिकारियों के कारण संगठन में गुटबाजी बढ़ी। निकाय चुनाव में सिंबल वितरण में भी लापरवाही रही। एक ही स्थान पर महापौर पद के दो प्रत्याशियों के पास पार्टी सिंबल पहुंच गया। पार्टी के एक अहम पदाधिकारी ने बताया कि बदलाव को लेकर होमवर्क पूरा हो चुका है, जल्द ही हाईकमान इस संबंध में लिस्ट जारी कर देगा।
अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिले परिणाम
निकाय चुनाव में पार्टी ने सफलता के जो दावे किए थे, उसके अनुरूप परिणाम नहीं मिले। इससे पहले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस की यही स्थिति रही थी। इससे उबरने के लिए कांग्रेस ने पिछले साल सितंबर में नया सांगठनिक प्रयोग किया था। प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही यूपी को छह हिस्सों में बांटते हुए छह प्रांतीय अध्यक्ष भी बनाए थे।