मोदी सरकार के दूसरे बजट से यूपी की कुछ अपेक्षाएं पूरी हुई हैं, लेकिन ज्यादातर उम्मीदों को पंख नहीं लग सके। चार हजार मेगावाट के अल्ट्रा मेगा पावर प्लांट को छोड़ दें तो सूबे के लिए किसी बड़ी परियोजना की घोषणा नहीं हुई।
बजट में कई राज्यों में राष्ट्रीय स्तर के संस्थान खोलने तथा बिहार और पश्चिम बंगाल को विशेष सहायता देने की घोषणा की गई है, लेकिन यूपी इसमें भी खाली हाथ रहा।
‘नमामि गंगे’ प्रोजेक्ट के लिए बजट का प्रावधान कर देने से गंगा की सफाई का रास्ता जरूर खुल गया है। वहीं, वाराणसी को विश्व सांस्कृतिक धरोहर बनाने, लखनऊ मेट्रो को रफ्तार देने तथा सूबे में स्मार्ट सिटी बनाने के लिए बजट में धन की व्यवस्था होने से थोड़ा सुकून जरूर मिला है।
भाजपा को लोकसभा चुनाव में बंपर जीत दिलाने वाले यूपी को भाजपा सरकार से बड़ी परियोजनाओं की उम्मीद थी, लेकिन बजट में वे पूरी होती नहीं दिख रहीं। प्रदेश के खाते में सबसे बड़ी उपलब्धि एटा में स्थापित होने वाली 4000 मेगावाट क्षमता की पहली अल्ट्रा मेगा पावर परियोजना है।
पांच अल्ट्रा मेगापावर परियोजनाओं को मंजूरी
बिजली मंत्रालय की स्थल चयन समिति ने पिछले दिनों एटा को उपयुक्त बताते हुए केंद्र को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुद इस परियोजना में दिलचस्पी दिखाते हुए केंद्र से संपर्क बनाए हुए थे। बजट में जिन पांच अल्ट्रा मेगा पावर परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, उनमें एटा भी शामिल है।
मोदी सरकार बनने के बाद जोर-शोर से शुरू की गई ‘नमामि गंगे’ परियोजना के लिए 2100 करोड़ रुपये का आवंटन हो जाने से गंगा की सफाई की उम्मीदें बढ़ी हैं। यूपी में गंगा 800 किमी लंबाई में बहती है और 17 जिलों से होकर गुजरती है।
जाहिर है, गंगा सफाई का सबसे ज्यादा लाभ भी उत्तर प्रदेश को मिलेगा। कॉरपोरेट हाउस से कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) से इतर गंगा सफाई या स्वच्छता अभियान के लिए मिलने वाले दान पर सौ फीसदी कर छूट रहेगी।
इससे ‘नमामि गंगे’ और स्वच्छता कार्यक्रम के लिए ज्यादा धन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। लखनऊ समेत देश के 11 शहरों में मेट्रो के लिए 8260 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे लखनऊ मेट्रो का काम रफ्तार पकड़ेगा।
पीएम के संसदीय क्षेत्र पर मेहरबानी
बजट में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का जरूर ध्यान रखा गया है। मंदिरों के शहर वाराणसी को विश्व सांस्कृतिक धरोहर स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे वाराणसी के कायाकल्प की उम्मीदें बढ़ी हैं।
स्मार्ट सिटी बनाने का रास्ता खुला
बजट से देश में सौ स्मार्ट शहर बनाने का रास्ता भी खुल गया है। इनमें सूबे के दो या तीन शहर शामिल हो सकते हैं। अभी तक अमेरिका के सहयोग से इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी बनाने की योजना है।
जापान के सहयोग से क्योटो की तर्ज पर वाराणसी का सुंदरीकरण भी होना है। इसके अलावा भी प्रदेश सरकार ने कुछ स्मार्ट सिटी बनाने का प्रस्ताव भेजा है। केंद्र सरकार इनमें से किसे मंजूरी देगी, अभी तय नहीं है।