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जानिए, आजादी की लड़ाई में क्यों कूदे थे भगत सिंह?

Mon, 17 Aug 2015 12:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
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सरदार भगत सिंह जिन उद्देश्यों को लेकर देश की आजादी की लड़ाई में कूदे थे और हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए,आजादी के बाद सरकारों ने उन एजेंडों को हाशिए पर पहुंचा दिया।
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जो अंग्रेजी व्यवस्था पहले थी,वह आजादी के बाद भी कायम रही। सरकारों ने भगत सिंह को दिलों तक तो पहुंचा दिया पर विचारों तक पहुंचाने का प्रयास कभी नहीं किया।

सरकारें भगत सिंह की शख्सियत को फ्रीज करके रखना चाहती हैं ताकि उनकी दुकान चलती रहे। यह कहना है शहीदे आजम भगत सिंह के छोटे भाई कुलवीर सिंह के पौत्र अभितेज संधू का।
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चंडीगढ़ में रहने वाले अभितेज रविवार को शहर में थे। अमर उजाला से उन्होंने देश,समाज व राजनीति से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की।

चाचा के कहने पर लड़ाई में कूदे भगत सिंह

अभितेज बताते हैं कि भगत सिंह उनके खानदान में चौथी पीढ़ी के क्रांतिकारी थे। इससे पहले उनके चाचा अजीत सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाई थी। उनके कहने पर ही भगत सिंह आजादी की लड़ाई में कूदे।

अजीत सिंह के नेतृत्व में ही ‘पगड़ी संभाल जट्टा...’ आंदोलन शुरू हुआ,जो किसानों पर लगाए गए टैक्स के विरोध में था। उन्होंने ही विदेश जाकर गदर पार्टी को अपने जीवन के 38 साल दिए।

उन्होंने नेहरू से कहा था कि देशहित में कुर्सी की कुर्बानी दे दें। पर, नेहरू ने ऐसा नहीं किया। उनके इस निर्णय ने देश के बंटवारे में आग का काम किया। अंतत:15 अगस्त, 1947 को उनका निधन हो गया।

पर,उनके विचारों से प्रेरित होकर ही भगत सिंह आगे बढ़ते रहे। सरदार अजीत सिंह पर फिल्म बनाने के लिए मनोज कुमार से बात हुई थी।
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शहीद के दर्जे से बहुत ऊंची है उनकी शख्सियत

भगत सिंह को शहीद का दर्जा नहीं देने पर अभितेज कहते हैं कि कोफ्त इस बात पर नहीं होती कि सरकारों ने उन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया। चूंकि राष्ट्रीय ही नहीं,अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें शहीदे आजम का खिताब प्राप्त है।

पर,भगत सिंह के विचारों को हाशिए पर रखना जरूर दुखद है। भगत सिंह की शख्सियत शहीद के दर्जे से बहुत ऊंची है। यह सब जानते हैं।

अभितेज कहते हैं कि सरकारें युवाओं को विचारधारा के नाम पर बहका रही हैं। उन्हें अपनी विचारधारा के खांचों में फिट करने में लगी हुई हैं। लेकिन युवा अब सवाल उठाने लगे हैं। इसका जरिया सोशल नेटवर्किंग साइट्स बनी हैं।

पंजाब यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र में ग्रेजुएशन कर मानवाधिकार के लिए काम करने वाले अभितेज बताते हैं कि युवाओं को शहीदे आजम के विचारों से रूबरू कराने की योजना बना रहा हूं।

आजादी में छह लाख से अधिक लोगों ने खुद को कुर्बान कर दिया। इनमें से कुछेक के नाम ही जुबां पर रहते हैं। उनके नामों को सरकारों ने कभी मुख्यधारा में आने ही नहीं दिया। जैसे,महात्मा गांधी बनाम भगत सिंह का मुद्दा बनाकर युवाओं को उलझाए रखा।

गांधी जी चाहते तो भगत सिंह को बचा सकते थे जबकि असल मुद्दे तो और हैं। युवाओं की सोच को कुंद करने का काम हो रहा है,जिसे रोकना जरूरी है।
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