लखनऊ। खाने में अधिक नमक और चीनी, शारीरिक निष्क्रियता और आरामदायक जीवनशैली दिल को नुकसान पहुंचा रही है। लोगों में जागरूकता की कमी भी हृदय रोगों का एक बड़ा कारण है। अमेरिका निवासी डॉ. निर्मल जोशी ने सोमवार को केजीएमयू के ब्राउन हॉल में ये बातें कहीं।
उन्होंने बताया कि मधुमेह और रक्तचाप दिल की बीमारी के प्रमुख कारण हैं। समय पर जांच व इलाज से इन खतरों से बचा जा सकता है। डॉ. रेनू जोशी ने कहा कि पेट का मोटापा हृदय रोग का बड़ा कारक है। मांसपेशियों की कमी और वसा की अधिकता से मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बढ़ता है। ऐसे में नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और वजन नियंत्रण बेहद जरूरी है। केजीएमयू लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. ऋषि सेठ्ठी ने खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) का स्तर नियंत्रित रखने पर जोर दिया।
बताया कि भारतीयों में कम उम्र में दिल के रोग चिंता का विषय है। तंबाकू, शराब, खराब खानपान और शारीरिक निष्क्रियता प्रमुख जोखिम कारक हैं। युवाओं को नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और समय-समय पर रक्तचाप, शर्करा व कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने नियमित स्वास्थ्य जांच और जीवनशैली में सुधार पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जागरूकता से मधुमेह, रक्तचाप, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर हृदय रोग का खतरा काफी कम किया जा सकता है।