महाकुम्भ पर हजारों तीर्थयात्रियों की आवाजाही को देखते हुए परिवहन निगम प्रशासन आठ हजार बसों को बेड़े में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इसमें पांच हजार बसें इलेक्ट्रिक होंगी। इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
दरअसल, परिवहन निगम प्रशासन का पूरा फोकस बेड़े को पर्यावरण संरक्ष्ाण के लिहाज से तैयार करना है। फिलहाल रोडवेज बसों के बेड़े में करीब 12 हजार बसें हैं। इसमें उम्र पूरी कर चुकी बसों को क्रमबद्घ ढंग से बाहर किया जा रहा है। वहीं डीजल के साथ इलेक्ट्रिक बसों को बेड़े में जोड़ने की कवायदें भी की जा रही हैं। इसी क्रम में अगले साल महाकुम्भ से पहले नई बसों को निगम में शामिल कर यात्रियों की सुविधाओं में वृद्घि की तैयारियां की जा रही हैं।
निगम के अफसरों ने बताया कि कुल आठ हजार बसों को रोडवेज के बेड़े में जोड़ा जाना है। इसमें पहले चरण में पांच हजार बसों को शामिल किया जाएगा। इसमें तीन हजार इलेक्ट्रिक बसें व दो हजार डीजल बसें होंगी। इसके बाद अगले चरण में तीन हजार अनुबंधित बसों को भी बेड़े में शामिल किया जाएगा, जिसमें दो हजार इलेक्ट्रिक व एक हजार डीजल बसें रहेंगी। इन बसों के आ जाने से रोडवेज बसों का कायाकल्प हो जाएगा।
लखनऊ को मिलेंगी 250 नई बसें
महाकुम्भ से पहले रोडवेज के बेड़े में शामिल होने से लखनऊ परिक्षेत्र को भी लाभ होगा। मसलन, अभी रोडवजे के लखनऊ परिक्षेत्र में करीब हजार बसें हैं। सूत्र बताते हैं कि ढाई सौ नई बसों को भी इस बेड़े में जोड़ा जाएगा। इन बसों को लखनऊ से प्रयागराज, अयोध्या, वाराणसी, आगरा रूट पर चलाया जा सकता है। हालांकि, इस मुद्दे पर अफसर आधिकारिक रूप से कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
150 चार्जिंग स्टेशनों की पड़ेगी जरूरत
रोडवेज के आला अफसर बताते हैं कि जब बेड़े में पांच हजार इलेक्ट्रिक बसों को शामिल किया जा रहा है। ऐसे में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या में भी वृद्घि करनी होगी। 150 से अधिक चार्जिंग स्टेशनों को विकसित करना होगा, ताकि बसों की चार्जिंग में असुविधाओं का सामना न करना पड़े। इन बसों से ऊर्जा के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।