राजधानी में कोरोना संक्रमित गंभीर रोगियों के इलाज का संकट अब दूर हो रहा है। अब सरकार द्वारा अधिग्रहीत प्रमुख सरकारी व निजी चिकित्सा संस्थानों में बेड उपलब्ध मिल रहे हैं।
डीआरडीओ की ओर से शुरू अस्पताल में तो आधे बेड भी नहीं भरे हैं। प्रशासन का भी दावा है कि अब आईसीयू व वेंटिलेटर के बेडों की कोई कमी नहीं है।
बृहस्पतिवार देर शाम ऑनलाइन पोर्टल पर डीआरडीओ के अस्पताल में जहां 200 से अधिक बेड खाली दिखे, वहीं केजीएमयू में 806 में 73 बेड खाली थे। पीजीआई में भी 322 में 42 बेड खाली रहे।
अन्य में बलरामपुर अस्पताल में 300 में से 76 बेड, एरा मेडिकल कॉलेज में 400 में 130 बेड, इंटीग्रल में 320 में 250 बेड उपलब्ध रहे।
लोहिया संस्थान के अस्पताल में 200 में से 56 और टीएस मिश्र अस्पताल में 125 में 23 बेड खाली रहे। खास बात यह कि उक्त में अधिकांश लेवल - तीन के अस्पताल हैं।
इनमें अधिकांश में कोविड कमांड सेंटर से ही सीधे भर्ती की जा रही है। सिर्फ मेदांता, सहारा, चंदन, मेयो जैसे अस्पतालों में अधिकांश बेड फुल चल रहे हैं।
जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने भी कहा है कि अब शहर में आईसीयू, वेंटिलेटर बेडों की कोई दिक्कत नहीं है। न ही कोई इलाज के लिए वेटिंग है। उनके अनुसार तत्काल बेड आवंटन हो रहा है।
ऑक्सीजन का भी संकट नहीं
जिलाधिकारी के अनुसार एक प्लांट बंद होने के बावजूद राजधानी में ऑक्सीजन का कोई संकट नहीं है। विभिन्न अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति हो रही है। जिस प्लांट में हादसा हुआ, वहां से ऑक्सीजन पाने वाले अस्पतालों को दूसरे प्लांट से आपूर्ति की जाने लगी है।