बेसिक शिक्षा विभाग के 1 लाख 58 हजार 914 विद्यालयों में अध्ययनरत 1.57 करोड़ विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष स्कूल बैग, स्कूल यूनिफॉर्म, पाठ्यपुस्तकें, स्वेटर और जूते-मोजे निशुल्क वितरित किए जाते हैं। सरकार इन सब पर डेढ़ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करती है।
निशुल्क सामग्री बच्चों को समय पर नहीं मिलने के कारण कई बार विभाग की फजीहत हुई है। करोड़ों खर्च करने के बाद भी बच्चों को उसका समय पर फायदा नहीं मिला। मुख्यमंत्री ने इसे लेकर अधिकारियों से नाराजगी जताई थी। हालांकि इस बार एक जुलाई से पहले 95 फीसदी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकें पहुंच गई हैं।
बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह ने निशुल्क सामग्री वितरण के लिए अलग से निकाय गठन का प्रस्ताव दिया है। इसमें संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी, लेखाधिकारी सहित अन्य कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। इन्हें केवल समय से निशुल्क सामग्री वितरण की जिम्मेदारी दी जाएगी।