बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी ने शिक्षकों के सम्मेलन में उनको खूब खरी-खोटी सुनाई।
यहां तक कह दिया कि शिक्षक स्कूल की दूरी कम कराने के लिए घूस तक देने से नहीं चूकते हैं।
वे बोले, मैंने कहा था कि शिक्षकों के ट्रांसफर में घूस की शिकायत मिली तो अफसरों की खबर लूंगा, पर गुरुजी को क्या कहूं, वे महान हैं।
किलोमीटर घटाने के लिए पैसे देने से भी नहीं चूकते। घूस देने से शिक्षक पद की गरिमा पर सवाल खड़ा होता है। चौधरी बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के रवींद्रालय में आयोजित विशेष अधिवेशन में मुख्य अतिथि थे।
उन्होंने कहा कि कुशीनगर, महाराजगंज, लखीमपुर खीरी सहित कई जिलों में शिक्षकों का टोटा है, पर शिक्षक वहीं पर तैनाती की सिफारिश कराते हैं जहां पद कम हैं।
शिक्षकों का बुरा हाल है। नौकरी मिलने के बाद ही वे ट्रांसफर के लिए जुट जाते हैं। शिक्षक सुविधा की बात करते हैं। शिक्षकों को अच्छा वेतन दिया जा रहा है, इसलिए उन्हें काम करना चाहिए, ताकि अभिभावकों का विश्वास कायम हो।
शिक्षकों ने इस पर ध्यान न दिया तो 20 साल बाद परिषदीय स्कूलों में कोई बच्चा पढ़ने नहीं आएगा।
शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों से हाथ जोड़ कर प्रार्थना की कि ऐसा करें जिससे कॉन्वेंट स्कूल के बच्चे वहां से भागकर परिषदीय स्कूलों में आएं।
उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री से बात करने का आश्वासन दिया और वादा किया कि चार साल में उन्हें उनके जिले या पास के स्कूलों में जरूर भेज देंगे।
विधान परिषद सदस्य ओम प्रकाश शर्मा, राज्यमंत्री विजय मिश्रा, कृषि राज्यमंत्री मनोज कुमार पांडेय आदि ने भी संबोधित किया। संघ के अध्यक्ष लल्लन मिश्रा ने बेसिक शिक्षा मंत्री को मांगों से अवगत कराया।
अशोक गांगुली पर टिप्पणी
सीबीएसई के पूर्व चेयरमैन अशोक गांगुली पर टिप्पणी करते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि वे प्राथमिक विद्यालयों के पीछे पड़े हैं, जो सही नहीं है। बेसिक के शिक्षक बीएड, बीटीसी व टीईटी पास हैं। कॉन्वेंट स्कूल में तो बीए पास ही शिक्षक होते हैं।