मुश्किल में फंसे बच्चों को रेस्क्यू करने के बाद ही काम खत्म नहीं हो जाता और उन्हें उचित काउंसिलिंग देकर सामान्य जीवन की ओर मोड़ना अगली चुनौती होती है। पहले पक्ष पर जहां चाइल्ड लाइन और बाल कल्याण समिति लगातार काम कर रही हैं, दूसरे पक्ष में लखनऊ के रजा हुसैन जैदी जैसे युवाओं की भूमिका अहम है।
रजा मनोविज्ञान के स्टूडेंट हैं और वॉलेंटियर के रूप में चाइल्ड लाइन द्वारा रेस्क्यू किए गए बच्चों की काउंसलिंग कर रहे हैं। लखनऊ में हर महीने चाइल्ड लाइन द्वारा बीसियों बच्चों को बालश्रम से लेकर बाल-तस्करी जैसे मामलों में रेस्क्यू किया जा रहा है।
उन्हें जहां सरकार और कानून द्वारा संरक्षण व आश्रय दिया जाता है, तो वहीं उनके द्वारा झेली गई पीड़ा को भूलाने में रजा जैदी लखनऊ में काम कर रहे हैं। रेस्क्यू किए गए बच्चे कई तरह की जानकारियां कानून को दे सकते हैं, लेकिन झेली गई पीड़ा की वजह से उनकी मानसिक अवस्था ऐसी नहीं होती कि वे खुल कर किसी से भी बात कर सकें।