लगातार 6 घंटों में एक नहीं पूरे 65 लोकगीतों की गवनई। चैत्र से लेकर फाल्गुन माह तक त्योहारों पर गाए जाने वाले पारंपरिक लोकगीतों की मोहक प्रस्तुति संग नगर की गायिकाओं ने अनोखा रिकार्ड बनाने का दावा किया।
शुक्रवार को देवोत्थानी एकादशी-तुलसा विवाह के मौकेपर अवधी गीतों की लोकगवनई की बयार बही। लोकरंग फाउंडेशन-सृजन फाउंडेशन की ओर से राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में अवधी लोकगीतों की बयार दोपहर 3 बजे से लेकर रात 9 बजे तक बही।
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लखनऊ की लोकगायिका कुसुम वर्मा और उनके दल ने भारतीय संस्कृति से 12 महीनों के तीज-त्यौहारों पर गीत सुनाये और नृत्य प्रस्तुतियां दी।शुरूआत गणेश वंदना पहले मैं तुमको मनाऊं गौरी के लला से करने के बाद दल ने चैती- वन-वन फुलवा फुलाने हो रामा,
रामनवमी- श्रीरामजी कै जनम भये चैत, महावीर जयन्ती चीन्हत नाही, पहचानत नाही महावीर दर्शन कहां पायो, बुद्ध पूर्णिमा व बड़ा मंगल- लांगुरिया ऐसे डोले जैसे लंका में डोले हनुमान
कुसुम वर्मा और उनका दल प्रस्तुति देते हुए
- फोटो : amar ujala
रक्षाबंधन, शारदीय नवरात्र, दशहरा, करवा चौथ, दीवाली, छठ, गंगादशहरा, मकर संक्राति, बैसाखी, महाशिवरात्रि, होली पर गाए जाने वाले 65 गीतों के जरिये रंग जमाया।
मंच पर कुसुम का साथ गीता शुक्ला, पूर्विका पांडे, तेजस्विनी टंडन, ओम कुमारी सिंह, डा. रूबीराज सिन्हा, आरती सिंह, स्नेहा स्वरूप, रितु गौड़ ने गायन और नृत्य प्रस्तुतियों में दिया।
अरविन्द शर्मा ने आर्गन, ज्योति प्रकाश शुक्ला ने ढोलक, ट्विींकल तथा साइड रिदम पर शोभराज ने संगत दी। 6 घंटे की प्रस्तुति के बाद मार्बलस रिकार्ड आफ इंडिया के पदाधिकारियों ने रिकार्ड बनने की जानकारी हाल में बैठे लोगों को दी।