बेजुबान व बेसहारा जानवर बोल नहीं सकते। वे अपना दर्द किसी से कह नहीं सकते। लेकिन, समाज में कुछ ऐसे लोग हैं जो इन बेजुबानों की जुबान बने हुए हैं और उनको सहारा देने का प्रयास कर रहे हैं। लखनऊ की बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा नैना कुमार भी इन्हीं लोगों में से एक है।
कोई भी बेजुबान जब किसी परेशानी में नजर आता है तो वह उनकी मदद करने पहुंच जाती है। उनका इलाज कराती है और अंगीकृत करने में सहायता करती है। ऐशबाग स्थित राजेंद्र नगर निवासी नैना कुमार आईटी कॉलेज की बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है। पढ़ाई में तो अव्वल है ही साथ ही वह बेजुबान जानवरों को सहारा देने का भी काम करती है।
राजधानी में कोई भी जानवर जब सड़क पर मुसीबत में होता है तो उसकी मदद करने को सूचना मिलते ही दौड़ पड़ती है। अपने खर्चे पर इलाज कराती है और ठीक होने के बाद उनको आजाद कर देती है। नैना ने बताया कि श्वान, गाय, तोता समेत कई पक्षियों के लिए उन्हें कई फोन आते हैं।
सोशल मीडिया पर करती हैं प्रचार
नैना कुमार
- फोटो : अमर उजाला
जब भी उनके साथ कोई दुर्घटना होती है तो लोग उन्हें फोन करते हैं। उन्होंने बेजुबानों के लिए अपना मोबाइल नंबर शहर में बांट रखा है। फेसबुक समेत सोशल मीडिया के माध्यम से भी वह इन जानवरों की मदद के लिए प्रचार करती रहती है।
नैना ने बताया कि कभी-कभी इन जानवरों के इलाज में काफी खर्चा आता है तो इसके लिए वे सोशल मीडिया और अपने आसपास के क्षेत्र से डोनेशन भी एकत्रित करती हैं। बेजुबान जानवरों के प्रति इनका प्यार यूं ही नहीं जागा।
इनके अभिभावकों का भी जानवरों के प्रति लगाव है। ऐसे में जब भी सड़क पर किसी जानवर को दर्द से कराहते हुए देखती तो उनकी मदद के लिए दौड़ पड़ती। उन्होंने बताया कि पांच वर्ष पहले जब वह दसवीं में थी जब जानवरों और पक्षियों की सहायता करने का काम शुरू किया। तब वह अपने मोहल्ले व क्षेत्र में ही सहायता करती थी। धीरे-धीरे उनके बारे में कई लोग जानने लगे और अब राजधानी भर से उन्हें जानवरों की सहायता के लिए फोन आते हैं।
समय-समय पर चलाती हैं जागरूकता अभियान
जानवरों का सहारा बनी नैना
- फोटो : अमर उजाला
नैना जानवरों की देखभाल को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाती है। ज्यादातर मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग जानवर पाल तो लेते हैं, लेकिन उनकी बीमारी व देखभाल के बारे में उनको कोई जानकारी नहीं होती।
इसके लिए वे उनको जागरूक करती हैं और बीमार जानवरों का इलाज करवाती है। यही नहीं जानवरों के प्रति क्रूरता करने वालों को सबक सिखाने से भी वे पीछे नहीं हटतीं। उनके सामने ही एक लड़के ने श्वान को चोट पहुंचाई थी, जिसके बाद उन्होंने उस श्वान का इलाज करवाया और पुलिस में शिकायत कर उस लड़के को फटकार भी लगाई।
स्थानीय पुलिस ने लड़के को भविष्य में ऐसा न करने की सख्त हिदायत दी और दोबारा शिकायत मिलने पर एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी भी दी।
20 जानवरों को करा चुकी अंगीकृत
जानवरों के इलाज के बाद वह उनको सहारा देने का भी प्रयास करती हैं। नैना ने बताया कि जब वे ठीक हो जाते हैं तो उनको एडॉप्ट करने के लिए मुहिम चलाती हैं। अब तक वे 20 जानवरों को एडॉप्ट करा चुकी हैं। जिन लोगों ने इनको अंगीकृत किया है वे उनकी बेहतर देखभाल करते हैं और समय-समय पर फोटो भी भेजते रहते हैं।