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शादी के बाद सपने को उड़ान दी और पहुंच गईं 'मिसेज इंडिया 2019' के फाइनल में...जानिए कौन

Thu, 14 Feb 2019 01:53 PM IST
खुशबू गोयल संजय कुमार, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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ख्याति रतन
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बेटियां किसी से कम नहीं, उनके हौसलों की उड़ान के आगे गगन भी छोटा पड़ जाता है। यह साबित कर दिखाया है भारत देश की बहादुर बेटी ख्याति रतन ने। युवा अवस्था में माता-पिता को खोने के बावजूद अपना करियर बनाया और मुंबई में एक निजी बैंक में प्रोडक्ट मैनजर के पद पर पांच साल नौकरी की।
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फिर परिवार की जिम्मेदारी देखते हुए नौकरी छोड़ी, लेकिन महिलाएं किसी से कम नहीं साबित करने के लिए मिसेज इंडिया 2019 प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। बीते दिनों हुए सेमिफाइनल जीतने के बाद वह फाइनल में पहुंच गईं।  ख्याति ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि मिसेज इंडिया 2019 का फाइनल राउंड मई में होना है, उनका इस प्रतियोगिता में चयन सितंबर 2018 में हुआ था।

इसमें जोन के हिसाब से देशभर की महिला प्रतिभागियों का चयन हुआ है। यह प्रतियोगिता मिसेज इंडिया आईएनसी व मिसेज मोहिनी शर्मा माने 2016 की मिसेज वर्ल्ड की ओर से आयोजित करवाई जा रही है। 33 वर्षीय ख्याति ने बताया कि वह अब मुंबई में रहती हैं।
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एमडीयू इम्सार से किया बीबीए

शिक्षा भारती स्कूल, एमडीयू इम्सार से बीबीए करने के बाद उन्होंने आईसीएफएआई मुंबई से 2006 में एमबीए इन मार्केटिंग किया। इसके बाद वह निजी बैंक के कारपोरेट आफिस में नौकरी करने लगीं। उनका बेटा पराक्रम साढे़ छह साल व बेटी परिनूर दो साल की है।

बच्चों की देखभाल के लिए नौकरी छोड़ी, लेकिन घरेलू महिलाओं को होने वाली मायूसी देखकर व महसूस कर फिर अपनी पहचान नये सिरे से बनाने की ठान ली। मां बनने के बाद जिम में जाकर पहले अपना वजन कम किया और प्रोडक्शन हाउस एड फिल्म संचालित कर रहे पति प्रवीण धनखड़ ने स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से परिचय कराया और यहां से फिटनेस का जुनून शुरू हो गया।

इसमें उन्होंने कामयाबी हासिल की और यू-ट्यूब पर इंडियन फेमफिट पर उन्होंने फिजिकल फिटनेस और होम डाइट पर अपनी वीडियो अपलोड कर अपने अनुभव साझा किए। इसके बाद महिला वर्ग उनसे जुड़ती चली गईं और उनसे फिट रहने की सलाह लेने लगीं।
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महिलाओं को किया मोटिवेट

उन्होंने महसूस किया कि शादी होने के बाद महिलाओं में कुछ अलग करने की भावना नहीं रहती। बस इसे दूर करने के लिए उन्हें महिलाओं को मोटीवेट करना शुरू किया और बताया कि शादी होने और बच्चे होने के बाद किसी के सपने समाप्त नहीं हो जाते। हमारी लिमिटेशन हमारे दिमाग में हैं।

ख्याति ने बताया कि उनके पिता गुरु भारद्वाज पंजाब नेशनल बैंक में थे और वह अंतरराष्ट्रीय मंच कलाकार थे, लेकिन सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। पिता के जाने के बाद उनकी मां राजकुमारी तनाव में रहती थीं और जापानी बुखार के उपचार के दौरान उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया और 2012 के बाद उनके सिर पर माता-पिता दोनों का ही हाथ नहीं था।

उनके अलावा दो बहन ने भी इस विकट स्थिति में अपनी जंग जारी रखी। आज बड़ी बहन डॉ. यशोमति वनस्थली विद्यापीठ राजस्थान में एसोसिएट प्रोफेसर हैं और छोटी बहन खंजन मुंबई में ही सीनियर इंजीनियर के पद पर तैनात हैं।

 
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