प्रतिभाएं कहीं थमतीं नहीं, जहां भी मौका मिले फलक पर परचम फहरा ही देती हैं। लखनऊ में कई ऐसे प्रतिभाशाली नौजवान हैं, जो अपनी तकदीर खुद लिख और संवार रहे हैं। ऐसे ही हैं बहुत ही सुरीले मोहम्मद इमरान, जिनकी गायिकी का जलवा कई चैनलों पर प्रसारित होने वाले रियलिटी शो के साथ ही स्टेज पर भी दिखाई पड़ता है। पेश है उनसे हुई बातचीत के चुनिंदा अंश...
कई शहरों में किए शो
इमरान बताते हैं कि लखनऊ महोत्सव में लगातार पांच साल तक कार्यक्रम किया। साथ ही सैफई महोत्सव, आगरा महोत्सव व महादेवा महोत्सव में भी लगातार कार्यक्रम पेश किए। बताते हैं कि अहमदाबाद के मशहूर जैन मंदिर में हुए प्रोग्राम में बॉलीवुड के 100 म्यूजिशियनों के साथ काम करने का अनुभव सबसे खास रहा।
इंडियन आइडल में आवाज का जादू बिखेरकर उन्होंने जजों के साथ ही दर्शकों का भी दिल जीत लिया। इसके बाद अन्नू कपूर की अंत्याक्षरी फैमिली प्रोग्राम का विजेता बने तो वे तमाम घरों में जाना पहचाना नाम बन गए। दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले भारत की शान में भी इमरान टॉप 5 में रहे।
यूं हुई शुरुआत
इमरान बताते हैं कि मेरे परिवार का सिंगिंग से कोई भी नाता नहीं है। शुरुआत में यूं ही गुनगुनाता था। स्कूल में होने वाले कार्यक्रमों में भी गाता था, लोग तारीफ भी करते पर ये गुमान नहीं था कि मेरा ये पैशन ही प्रोफेशन का रुख अख्तियार कर लेगा।
परिवार से मिला सपोर्ट
मोहम्मद इमरान
- फोटो : अमर उजाला
ये है सपना
बड़े अफसोस की बात है कि नौशाद और रफी साहब जैसे सुरों के बादशाहों के शहर की गूंज आजकल फिल्म इंडस्ट्री में नहीं है। चाहता हूं कि प्लेबैक सिंगिंग में ऐसा करूं कि लोगों के जेहन में लखनऊ का नाम एक बार फिर से कौंधे।
रियलिटी शो में सोनू निगम, शान, अलका याग्निक, राहत फतेह अली खान जैसे कलाकारों के सामने गाने का मौका मिला। उन्होंने तारीफ की तो हौसला दोगुना हो गया। शो के बाद भी कई कलाकारों ने मुझे वैनिटी में बुला कर बात की, अपना पर्सनल नंबर दिया और कभी भी जरूरत पड़ने पर मदद का भरोसा दिया।
परिवार से मिला सपोर्ट
जब आप एक ऐसे परिवार से होते हैं, जहां कोई भी सिंगर नहीं होता तो काफी मुश्किलें आतीं हैं। जैसे, रियाज करते समय कहां पर सुर नहीं लग रहे ये बताने वाला कोई नहीं होता। इसके बावजूद मैं बहुत ही खुशकिस्मत हूं कि मेरे पैरेंट्स ने हमेशा मुझे आगे बढ़ाने में सपोर्ट किया। मुझे पता है कि कई बार मेरे रियाज से उनकी जिंदगी में खलल पड़ा, पर कभी भी इसकी शिकायत उन्होंने नहीं की। बताते हैं कि आज जिस मुकाम पर हूं उसमें मेरी अम्मी मेहताब जहां का सबसे ज्यादा हाथ है।