अपने अधिकारों के लिए सहारा तलाशने वाली महिलाओं के लिए शिवा मिश्रा एक नजीर हैं। छोटी उम्र के बावजूद शिवा मिश्रा महिला अधिकारों की आवाज न सिर्फ उठाती हैं बल्कि इसके लिए सड़क पर उतरने से भी गुरेज नहीं करती हैं।
महिला अधिकारों के साथ ही शिवा मिश्रा लोगों को जरूरत पड़ने पर न सिर्फ खून का बंदोबस्त करती हैं बल्कि खुद भी रक्तदान करती हैं। शिवा मिश्रा ने बताया कि बचपन से ही जब अपने आसपास किसी महिला जुल्म होते देखती थीं उसके लिए कुछ करना चाहती थीं।
थोड़ा बड़े होने पर वे इसकेलिए काम करने लगीं। इसके बाद एडवा जैसे संगठन से जुड़कर बाकायदा महिलाओं के लिए काम करना शुरू कर दिया। इन कामों में बस्तियों में जाकर लोगों को पढ़ाना, उन्हें अधिकारों के बारे में जागरुक करने आदि जैसे काम भी शिवा ने करने शुरू कर दिये।