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लखनऊ के सतीश गुप्ता भूखों को भोजन और बच्चों को दे रहे शिक्षादान

Sat, 09 Feb 2019 03:21 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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सतीश गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
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समाज में कोई भी भूखा न सोए और कोई भी बच्चा अशिक्षित न रहे। इसी सोच के साथ लखनऊ के सतीश गुप्ता अपने साथियों संग समाजसेवा में लगे हैं। सतीश पढ़ाई के साथ खुद का व्यवसाय कर दूसरों को रोजगार तो देते ही हैं, दोस्तों संग संस्था का गठन कर भूखों को भोजन और बच्चों को पढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।
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सतीश गुप्ता श्री जय नारायण पीजी कॉलेज बीए द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। बात करीब पांच वर्ष पुरानी है। पिता हरि प्रसाद गुप्ता शादियों में खाना बनाने का काम करते थे। सतीश तब हाईस्कूल कर रहे थे। उन्होंने खुद का कैटरिंग का व्यवसाय खोलने की सोची।

पिता के साथ इस नवाचार को साझा किया और कुछ ही समय में खुद के कैटरिंग के व्यवसाय को मूर्तरूप में ला दिया। इसी दौरान उन्हें आभास हुआ कि शादियों में काफी खाना व्यर्थ जाता है। उन्होंने इसको उपयोग में लाने की ठानी।
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अपने कॉलेज साथी सोमनाथ कश्यप के साथ संस्था बदलाव एक कदम शिक्षा की ओर का गठन किया और जरूरतमंदों को भोजन मुहैया कराना शुरू कर दिया। शादियों में जो भोजन बच जाता है उसे वो रात में जरूरतमंदों के बीच बांट देते हैं।

साथियों संग मिलकर अन्य कैटरिंग व्यवसायियों से साधा संपर्क

सतीश गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
शुरुआत में उन्होंने अपने कैटरिंग से बचे भोजन को मुहैया कराया। बाद में उन्होंने अपने साथियों संग मिलकर अन्य कैटरिंग व्यवसायियों से संपर्क साधा। अब वे बाकियों से भी बचे हुए भोजन को एकत्रित कर जरूरतमंदों को खाना खिलाते हैं।

सतीश ने बताया कि हर किसी को इस पुनीत कार्य में साथ देना चाहिए। हमारे यहां पर भोजन बहुत नष्ट होता है। होटलों, रेस्टोरेंट, छोटे-मोटे ढाबों में बड़े पैमाने पर खाना नष्ट होता है। यही नहीं घरों में भी खाना व्यर्थ जाता है। इसको जरूरतमंदों के बीच बांट देना चाहिए। ऐसा करने से समाज में कोई भी भूखा पेट नहीं सोएगा।
 
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मलिन बस्ती में बिखेर रहे शिक्षा की रोशनी

सतीश गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
सतीश अपने संस्था के साथियों के साथ मिलकर आलमबाग, आरडीएसओ, गढ़ी कनौरा और फिनिक्स मॉल स्थित मलिन बस्तियों के बच्चों को पढ़ाने का काम भी कर रहे हैं। अपने साथियों की टीमों को बांट रखा है।

हर टीम हफ्ते में दो-दो दिन जाकर बच्चों को एक-एक घंटा पढ़ाने का काम करती है। वे बच्चों को न केवल पढ़ना व लिखना सिखाते हैं, बल्कि उनको शिक्षण सामग्री भी मुहैया कराते हैं। यही नहीं एक बार पढ़ने लिखने लायक हो जाने पर उनका स्कूलों में दाखिला भी दिलाते हैं।

इससे पहले वे जनता इंटर कॉलेज में करीब 35 बच्चों का दाखिला दिला चुके हैं। यही नहीं इन बच्चों के बीच महापुरुषों का जन्म दिवस भी मनाते हैं। केक काटकर, खाद्य सामग्री वितरित कर जन्म दिवस मनाते हैं और उन महापुरुषों के बारे में जानकारी देते हैं।

इसके अलावा वे सड़क पर सोने वाले गरीब लोगों के बीच कंबल और कपड़े भी वितरित करते हैं। इस सर्दी में भी उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर करीब सात सौ से ज्यादा गरीब लोगों के बीच कंबल वितरित कर चुके हैं।
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