कुछ लोगों ने सामाजिक सरोकारों से अपना नाता जोड़ लिया है। उन्हें जैसे ही कोई जरूरतमंद दिखता है, उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ा देते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्रा हर्षिता मिश्रा भी उन्हीं लोगों में से एक हैं। वे न केवल वंचित बच्चों को शिक्षित करती हैं बल्कि कमजोर वर्ग के बच्चों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक भी करती हैं।
हर्षिता एमए अंग्रेजी द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा हैं। पढ़ाई के साथ वह सामाजिक कार्य में भी जुटी हैं। सरकारी प्राथमिक स्कूलों में पढ़ रहे कमजोर वर्ग के बच्चों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक करती हैं। हर्षिता बताती हैं कि इन सरकारी स्कूलों में ज्यादातर बच्चे इसलिए आते हैं कि यहां पर उन्हें मध्यान्ह भोजन मिलता है।
इसी के सहारे वह शिक्षा भी ग्रहण कर लेते हैं। लेकिन स्वास्थ्य और स्वच्छता के मामले में ये बच्चे काफी पिछड़े हैं। उनके परिवारीजन भी ध्यान नहीं देते। वो उनके बीच जाती हैं और बच्चों को जागरूक करती हैं, खासकर बालिकाओं को। रोज सुबह नहाकर स्कूल आने, सही ढंग से कपड़े व यूनिफॉर्म पहनने, बाल व नाखून ठीक रखने, उठने-बैठने के तरीके के बारे में बताती हैं।
घर और बाहर रहन-सहन का तरीका क्या है, इसके बारे में विस्तार से समझाती हैं। वहीं खुद को स्वच्छ रखने के साथ ही आसपास के क्षेत्र को भी स्वच्छ रखने के प्रति जागरूक करती हैं। हर्षिता ने बताया कि इन मामलों के बारे में बच्चों के परिवारीजन भी ज्यादा कुछ नहीं कहते। लेकिन जब उनको जागरूक किया जाता है तो बच्चों में स्वच्छ रहने की इच्छा जागृत होती है। बच्चों को जागरूक करने का कार्य उन्होंने तब शुरू किया जब वह बीए की छात्रा थीं.