पिरामिड के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध मिस्र का उत्तर प्रदेश के बरेली शहर से भी खास नाता है। बरेली का सुरमा दुनियाभर में मशहूर है। औषधीय गुणों के लिए पहचाने जाने वाला सुरमा भले ही गुलाब का हो या फिर ममीरा का। इन सभी में एक सामग्री विशेष है वह है मिस्र से आने वाले विशेष पत्थर।
दरअसल यूपी के बरेली का सुरमा खास पत्थर को पीसकर बनाया जाता है। सुरमा बनाने के लिए खानदानी कारीगर पत्थर आयात कर उसे सुरमे में ढाल रहे हैं। बरेली के इस सुरमे की जितनी मांग है, उसे पूरा करना बाजार के बस में नहीं है। बरेली के सुरमा के कारोबार से जुड़े व्यापारी दावा करते हैं कि क्रिकेटर विराट कोहली से लेकर लालू यादव और प्रियंका चोपड़ा तक ऐसी कोई शख्सियत नहीं है, जिसने बरेली का सुरमा नहीं लगाया हो।
इसलिए खास है बरेली का सुरमा
बरेली में छह पीढ़ियों से सुरमे का व्यापार कर रहे शावेज़ हाशमी का कहना है कि आज देश ही नहीं पूरी दुनिया में बरेली का सुरमा बहुत प्रसिद्ध है। विदेशों में सुरमा केवल श्रृंगार के लिए उपयोग होता है, लेकिन बरेली में बनने वाला सुरमा श्रृंगार के साथ-साथ औषधि के तौर पर भी उपयोग होता है। सुरमा दिल्ली और मुंबई में भी तैयार किया जाता है, लेकिन उसमें कई प्रकार के पाउडर मिलाए जाते हैं। जबकि बरेली में तैयार होने वाले सुरमे की खास बात यह है कि यह स्टोन बेस होता है। इसे मिश्र अब इजिप्ट से आने वाले एक खास पत्थर को पीसकर तैयार किया जाता है। इस विशेष पत्थर को किसी मशीन से नहीं बल्कि मजदूर हाथों से घिसते हैं। फिर इसे गुलाब जल में डालते हैं, ताकि पत्थर की गर्मी खत्म हो जाए।
डिमांड ज्यादा, सप्लाई कम
सुरमे को अलग-अलग बीमारियों के हिसाब से तैयार किया जाता है। उसी हिसाब से सुरमे के पाउडर में यूनानी और आयुर्वेदिक औषधि मिलाई जाती है। ताकि लोग इसे औषधि के तौर पर भी प्रयोग कर सकें। औषधि के तौर पर तैयार होने वाले विभिन्न प्रकार के सुरमे में हीरे को छोड़कर सोना, चांदी, तांबा और जाफरान समेत कई प्रकार की महंगी चीजें भी मिलाई जाती हैं।
आज पूरे देश में बरेली के सूरमे की इतनी मांग है कि शहर का पूरा बाजार भी इसे पूरा नहीं कर पा रहा है। एक दिन में बरेली से करीब 25 किलो सुरमा देशभर में सप्लाई किया जाता है। बरेली का गुलाम सुरमा तो बच्चों से लेकर बड़े तक लगाते है, वहीं ममीरा सुरमा केवल बड़े ही अपनी आंखों में लगा सकते हैं।
जीएसटी का सुरमा उद्योग पर पड़ा असर
हाशमी का कहना है कि एक ग्राम से लेकर 10 ग्राम तक सूरमे के पैकेट तैयार किए जाते हैं। इसे बनाने में पांच रुपये से लेकर 150 रुपये तक का खर्च आता है। आज बरेली में सुरमा का व्यापार करने वाले, बेचने वाले और कारीगर मिलाकर हजारों लोग हैं, लेकिन इस व्यापार पर जीएसटी ने असर डाला। सुरमा व्यापारियों की मांग है कि सरकार इस पर टैक्स खत्म करे ताकि हम अपने पुश्तैनी और परंपरागत उद्योग को बचा सके। राज्य सरकार से मांग है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा प्लेटफार्म तैयार करे, जिससे हम अपना व्यापार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जा सकें।
फिल्मी दुनिया से लेकर क्रिकेटर, नेता तक हैं कद्रदान
हाशमी बताते है कि, पहले लोग शौकिया सुरमा लगाते थे लेकिन जब इसके फायदे नजर आने लगे तो इसकी डिमांड बढ़ने लगी। पहले ज्यादातर मुस्लिम ही इसका इस्तेमाल करते थे, मगर अब यह हर मजहब के लोगों की आंखों में नजर आता है। आज कई नेता, अफसर और फिल्मी सितारों के अलावा भारतीय क्रिकेटर भी इसे बरेली से मंगवाते हैं। वे सलाह देते हैं कि,सुरमा आंखों को दुरुस्त रखने में मदद करता है। आंखों में धूल जाने पर यह सुरमा उसकी सफाई करता है। रात में सोते समय आंखों में सुरमा डालने से आंखें दुरुस्त रहती हैं। इससे आंखें चमकदार भी रहती हैं।