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मोदी की पहल से निखरी 'काशी के अस्सी' की रंगत

Mon, 22 Dec 2014 12:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस अस्सी घाट पर फावड़ा चलाया था, उसकी सूरत अब बदल गई है। सिल्ट हटने के कारण सीढ़ियों का सौंदर्य निखर आया है।
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रविवार को नया अस्सी घाट के सातवें प्लेटफार्म की सिल्ट भी हटा ली गई। घाट के उत्तरी हिस्से की सिल्ट पोकलैन की मदद से हटाई जा रही है। घाट पर लगी बेंचों पर बैठकर लोग गंगा की लहरों को निहारने का सुख ले रहे हैं।

सफाई में लगी संस्थाओं ने पीएम से महीने भर में घाट को साफ करने का वादा किया था। अपने इस कौल को पूरा करने के लिए संस्थाएं रात-दिन काम करके घाट को पूरी तरह साफ करने में जुटी हैं।
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करें भी क्यों नहीं, आखिर पीएम 25 दिसंबर को इस घाट की बदली सूरत देखने जो आने वाले हैं।

लौट रही पर्यटकों की बहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फावड़ा चलाने के बाद से यहां सफाई अभियान पर शुरू हुई मेहनत रंग लाने लगी है। पुराने अस्सी घाट के नौ में सात प्लेटफार्म साफ हो गए हैं जबकि दो प्लेटफार्म और तीन सीढ़ियां अभी पानी में डूबी हैं।

नए अस्सी घाट के सभी सात प्लेटफार्म से न सिर्फ मिट्टी हटा ली गई है बल्कि पूरी तरह से झाड़-बुहार कर साफ कर दिया गया है। ध्यान हो कि वर्ष 2001 तक शांतिलाल जैन बाढ़ के बाद पुराने अस्सी घाट की धुलाई करके सिल्ट हटवाते थे। उसके बाद यह सिलसिला बंद हो गया।

नया घाट तो उसके बाद बनाया गया। उसके बाद दोनों घाट पर सिल्ट जमा होने लगी और सीढ़ियां ढक गईं। लगभग एक दशक बाद सीढ़ियां खुली-खुली दिखाई दे रही हैं तो घाट पर घूमने वालों को सुखद अनुभूति हो रही है।

अस्सी घाट के निवासी त्रिलोकी नाथ शुक्ला और दीनानाथ शर्मा का कहना है कि प्रधानमंत्री की पहल रंग लाई है।

चार ट्राली हटी सिल्ट

आठ नवंबर की सुबह पीएम ने जब पुराने अस्सी घाट पर फावड़ा चलाकर सफाई अभियान का श्रीगणेश किया तब सनबीम समूह के चेयरमैन दीपक मधोक ने महीने भर में सफाई कराने का भरोसा दिलाया था और उन्होंने निर्धारित समयावधि में अपने हिस्से का काम पूरा करके दिखा भी दिया।

इससे लगे नया अस्सी घाट के सातवें प्लेटफार्म की सफाई सुलभ इंटरनेशनल ने रविवार को करा ली। 20 से अधिक ट्रैक्टर-ट्राली लगवाकर सिल्ट हटाई जा रही है। चार सौ ट्राली सिल्ट रोजाना हटाई जा रही है।
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अस्सी घाट पर सफाई का स्थायी हल निकालने का सुझाव

बीएचयू की गंगा प्रयोगशाला के पूर्व निदेशक प्रो. यूके चौधरी ने अस्सी घाट पर सिल्ट की सफाई का स्थायी समाधान निकालने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि घाट की पारिस्थितिकी में बदलाव आने की वजह से वहां सिल्ट का जमाव हो रहा है।

जब तक उस तकनीकी दिक्कत को दूर नहीं किया जाएगा, तबतक हर साल इसी तरह खुदाई करानी पड़ेगी। गंगा के प्राकृतिक ढाल को जब तक मूल रूप में नहीं किया जाएगा तब तक इसी तरह घाटों की सफाई के लिए जूझना पड़ेगा।
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