घरेलू एलपीजी पर कैश बेस सब्सिडी की राह फिलहाल आसान होती नजर नहीं आ रही। अभी तेल कंपनियां प्रस्तावित योजना को लेकर पूरी तरह पटरी पर आ भी नहीं पाई हैं कि बैंकिंग संस्थाओं ने इसमें अड़ंगा लगा दिया है।
लीड बैंक सहित अन्य सभी राष्ट्रीयकृत व गैर राष्ट्रीयकृत बैंकों ने गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं से लिए कराए जा रहे कंज्यूमर नंबर लिंकअप फॉर्म जमा करने से इंकार कर दिया है।
बैंकों से जुड़े प्रबंधन का कहना है कि अभी तक न तो आरबीआई और न ही केंद्रीय वित्त मंत्रालय से खाता लिंकअप करने के संबंध में कोई दिशा निर्देश भेजे गए हैं।
ऐसे में बिना निर्देश और खाता लिंकअप कराने की व्यवस्था किए बिना लिंकअप फार्मों को जमा कैसे किया जा सकता है। एक जनवरी से प्रस्तावित एमडीबीटीएल को लेकर बैंकिंग संस्थाओं के इस नकारात्मक रवैये ने घरेलू गैस उपभोक्ताओं के साथ ही तेल कंपनियों की परेशानियों को भी बढ़ा दिया है।
एमडीबीटीएल को लेकर व्याप्त इस ऊहापोह की स्थिति के बाद अब जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप कर परेशानी से छुटकारा दिलाने की कवायद शुरू की है।
लिंकअप फॉर्म जमा न किए जाने की शिकायत के बाद एडीएम आपूर्ति ओपी राय ने सोमवार को लीड बैंक की अगुवाई में प्रमुख बैंकों के प्रबंधन, तेल कंपनी अधिकारियों व गैस एजेंसी संचालन से जुड़े फेडरेशन पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है।
इस मसले पर तीनों के ही बीच चर्चा कर समाधान निकाला जाएगा। जिले में एक जनवरी से एमडीबीटीएल को लागू किए जाने का ऐलान घरेलू एलपीजी की आपूर्ति से जुड़ी तेल कंपनियों ने किया है।
इसके तहत घरेलू एलपीजी कस्टमरों को साल भर में मिलने वाले सस्ती दर के निर्धारित 12 सिलेंडरों की सब्सिडी राशि बुकिंग के बाद सीधे उनके आधार कार्ड से जुड़े बैंक खाते या कंज्यूमर नंबर लिंकअप बैंक खाते में पहुंचेगी।
जबकि सिलेंडर लेते समय उपभोक्ता को पूरा बाजार मूल्य ही अपनी जेब से अदा करना होगा। तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं को आधार कार्ड और बिना आधार कार्ड की दो श्रेणी में बांटते हुए खाता लिंकअप कराने को बीते 10 नवंबर से फॉर्मों का वितरण गैस एजेंसियों से शुरू किया है।
गैस एजेंसियों से आधार कार्डधारी कस्टमरों को खाता लिंकअप कराने को फॉर्म-1 और फॉर्म-2 और आधारकार्ड न बनवा पाने के लिए कस्टमरों को सीधे बैंक खाता लिंकअप कराने को फॉर्म-3 व फॉर्म-4 का वितरण शुरू किया है।
उपभोक्ता द्वारा भरे जाने के बाद इनमें से एक फॉर्म गैस एजेंसी और दूसरा बैंक में जमा होना है। कुछ गैस एजेंसियों पर तीन दिनों में जमा हुए फॉर्म शनिवार को जब एजेंसी संचालकों द्वारा स्टाफ से बैंक में जमा कराने को भेजे गए तो बैंकिंग प्रबंधन ने इस बाबत कोई दिशा निर्देश न मिलने की बात कहते हुए फॉर्म जमा करने से इंकार कर दिया।