लंबी जद्दोजहद व सीबीआई के बढ़ते दबाव बाद मंगलवार को बैंक लोन फ्रॉड मामले में फंसे रोटोमैक कंपनी के चेयरमैन विक्रम कोठारी की केजीएमयू से छुट्टी कर दी गई। वह करीब ढाई माह से लिंब सेंटर के (पीएमआर) फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैब्लिटेशन विभाग में भर्ती थे।
मेडिकल बोर्ड में कोठारी के सभी जांच रिपोर्ट पर मंथन बाद उन्हें पीजीआई ले जाने की सलाह दी गई। मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों का कहना था इलाज के बाद भी कोठारी का ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं हो रहा था। लिहाजा उन्हें पीजीआई भेजा गया था। सीबीआई टीम सुबह विक्रम कोठारी को लेकर यहां से निकल गई। सीबीआई ने करीब शाम पांच बजे कोठारी को जेल अस्पताल में भर्ती कराया है। जहां डॉक्टरों की टीम कोठारी का इलाज कराने में जुटी है।
रोटोमैक कंपनी के चेयरमैन विक्रम कोठारी का मुंबई के एक अस्पताल में रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद कोठारी ने हाथ पैरों में कमजोरी की बात कही थी। जेल डॉक्टरों ने उन्हें केजीएमयू के पीएमआर विभाग रेफर कर दिया था। यहां दो अप्रैल को उन्हें भर्ती किया गया था।
इस दौरान उन्होंने पेट में दर्द की शिकायत बताई। गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड जांच कराई। इसमें गॉल ब्लेडर में पथरी की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की जरूरत बताई। उनका ब्लड शुगर काफी बढ़ा होने की वजह से ऑपरेशन नहीं हो सका। केजीएमयू इंडोक्राइन समेत दूसरे विभाग के डॉक्टरों ने शुगर का इलाज किया। केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार ने बताया कोठारी को मेडिकल बोर्ड टीम ने पीजीआई ले जाने की सलाह दी थी।