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अल्पसंख्यक संस्थान की इजाजत पर रोक

Sun, 10 Aug 2014 10:30 AM IST
शत्रुघ्न शुक्ला/अमर उजाला, लखनऊ
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इस बात पर हैरानी जताई की माइनॉरिटी एजूकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट 2004 में बनने के बावजूद आज तक कोई सक्षम प्राधिकारी तैनात नहीं किया गया।
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कोर्ट ने सरकार से पूछा कि बगैर सक्षम प्राधिकारी के अनापत्ति प्रमाणपत्र के कितने शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता दी गई।

अदालत ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव एसपी सिंह से हलफनामे के साथ इसका ब्योरा तलब किया है।
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20 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना ने यह आदेश कानपुर के केएम कॉलेज की याचिका पर दिया।

कॉलेज की तरफ से कहा गया कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक संस्थान आयोग ने यह कहते हुए उसे अल्पसंख्यक संस्थान होने का प्रमाण पत्र देने से इन्कार कर दिया कि वह (याची) ये नहीं साबित कर पाए कि बौद्ध धर्म ग्रहण करने से पहले हिन्दू धर्म छोड़ दिया था या नहीं।

कालेज की ओर से आयोग के5 व 6 जून 2013 के आदेशों को चुनौती दी थी, जिसे कोर्ट ने निलंबित कर दिया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को तय की है।
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यह है आदेश

अदालत ने आश्चर्य जताया कि 10 साल से सक्षम प्राधिकारी तैनात नहीं होने के बावजूद अल्पसंख्यकों को सूबे में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने दिया गया।

साथ ही कहा, चूंकि सूबे में कोई सक्षम प्राधिकारी अधिसूचित नहीं किया गया है, लिहाजा अगले आदेशों तक राज्य सरकार किसी संस्थान को अल्पसंख्यक संस्थान को स्थापित करने की अनुमति नहीं देगी।
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