जांच के दौरान मामला तब और पेचीदा हो गया जब कुछ दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि उनके नाम से फर्जी बिल बनाए गए हैं। उन्होंने इतनी बड़ी मात्रा में दवा की खरीद नहीं की। कुछ व्यापारियों ने पुलिस को एफिडेविट देने की तैयारी भी जताई है। इससे अवैध नेटवर्क के संगठित होने की आशंका मजबूत हुई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच अब केवल खुदरा दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि थोक आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन माध्यम और ऑनलाइन भुगतान तक खंगाली जा रही है। कॉल डिटेल, डिजिटल पेमेंट रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर भी पड़ताल की जा रही है, ताकि अवैध सप्लाई चैन की पूरी तस्वीर सामने आ सके।