यह पंचायत कुछ अलग है। पंच परमेश्वर ने यहां ऐसे फैसले सुनाए कि गांव की दशा दिशा ही बदल गई। सबसे खास यह है कि ये सभी बाल पंच हैं। सिद्धार्थनगर के गांव हसुड़ी औसानपुर की बाल पंचायत ने ऐसे काम कर दिखाए हैं जिसने इस गांव को आज राष्ट्रीय फलक तक पहुंचा दिया। इस गांव को पूरे देश में तीसरा राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार मिला है। इसके अलावा मुरादाबाद के गांव मिलक अमावती को भी राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार मिला है। पंचायती राज विभाग के लिए यह भी गर्व करने की बात है कि पूरे उत्तर भारत में केवल उत्तर प्रदेश को ही पुरस्कार मिले हैं। बाकी इससे सटे राज्य नियमों की कसौटी पर खरे ही नहीं उतर पाए।
पंचायत राज विभाग की राष्ट्रीय ग्राम स्वराज पंचायत अभियान योजना प्रदेश के 58189 गांवों में चल रही है। इसी योजना के तहत विकास कराने वाले गांवों को पुरस्कृत करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार ने सभी प्रदेशों से आवेदन मांगे थे। यूपी में इस अभियान की नोडल अधिकारी प्रवीणा चौधरी के मुताबिक नौ विषयों पर कुल 27 आवेदन किए गए थे। इसके लिए अब सरकार ने पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। बाल हितैषी पंचायत श्रेणी में सिद्धार्थनगर के हंसूडी औसानपुर ग्राम पंचायत को यह पुरस्कार मिला है। पूरे देश में यह पुरस्कार तृतीय श्रेणी का है। 17 अप्रैल को इन गांवों के प्रधान, निदेशक पंचायती राज, योजना की नोडल अधिकारी, राष्ट्रपति के हाथों यह पुरस्कार प्राप्त करेंगे। पंचायती राज विभाग के निदेशक प्रमोद कुमार उपाध्याय के मुताबिक इस श्रृंखला में तेलंगाना को 13, ओडिशा को 8, महाराष्ट्र व केरल को 5, जम्मू कश्मीर को 3 व उप्र को 2 पुरस्कार मिले। मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और बिहार खाली हाथ ही रह गए। इससे विभाग का मनोबल बढ़ेगा और यूपी के गांवों में और विकास होगा।
इसलिए खास है यह हसुड़ी औसानपुर गांव
1024 लोगों की छोटी सी आबादी का गांव आज मिसाल बना है। यहां के ग्राम प्रधान दिलीप कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि हमने सरकार की मंशा पर बाल पंचायत का गठन किया। गांव के मुख्य पंचायत की तरह ही बाल पंचायत में एक सरपंच और 11 पंच बनाए। यहां की सरपंच श्रीया त्रिपाठी अब कक्षा दस में हैं। इस पंचायत में आधी संख्या बालिकाओं की है। इस पंचायत के निर्णय अद्भुत हैं। यह अपने निर्णय सुनाकर ग्राम पंचायत को भेजती है और फिर ग्राम पंचायत इस पर काम करती है। पंचायत राज विभाग ने भी इन निर्णयों को सराहा और इस गांव पर फोकस किया। ग्राम प्रधान दिलीप त्रिपाठी ने इस पहल को पूरी ताकत से आगे बढ़ाया। इस पंचायत ने गांव में लाइब्रेरी, खेल, स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता, बेंच, साफ सफाई, टीकाकरण , आंगनबाड़ी कार्यक्रम आदि पर फोकस किया। घर-घर जाकर जागरूकता फैलाई। इसका असर यह रहा कि इस गांव के सरकारी स्कूल में 302 बच्चे हैं, जिसमें 54 प्रतिशत बालिकाएं हैं। यहां पढ़ा रहे सभी अध्यापकों व अन्य स्टॉफ के बच्चे भी यहीं पढ़ते हैं। 70 बच्चे ऐसे यहां आए हैं जो पहले निजी स्कूलों में पढ़ रहे थे।
गांव में अंतरिक्ष प्रयोगशाला
बड़ी सफलता यह है कि इस गांव में अंतरिक्ष प्रयोगशाला है। यहां के बच्चे ड्रोन उड़ाते हैं। इस गांव को तीन बार दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तीकरण पुरस्कार, तीन बार नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार, उत्कृष्ट ग्राम पुरस्कार मिल चुके हैं। यह बाल पंचायत अपने प्रधान के साथ इसरो अहमदाबाद में आमंत्रित की जा चुकी। सीएम, राज्यपाल आदि से मिल चुकी है। इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल भोपाल में भाग ले चुकी है। अब यह गांव बकरी और गो पालन का भी प्रयोग कर रहा है। दरअसल यहां के प्रधान दिलीप विभिन्न पुरस्कारों से मिली राशि को इसी गांव में विकास कार्यों पर खर्च कर रहे हैं।
सतत विकास का उदाहरण बना है गांव मिलक अमावती
मुरादाबाद का गांव मिलक अमावती आज सतत विकास का उदाहरण बन गया है। इस गांव को सतत विकास श्रेणी में पुरस्कार मिला है। इस ग्राम पंचायत में तीन राजस्व गांव मिलक, अमावती एवं मेवला हैं। चार हजार की आबादी है। ग्राम प्रधान गार्गी चौधरी कहती हैं तीनों गांवों में एक साथ सतत विकास हो रहा है। सबसे बड़ा काम गांवों में सड़क निर्माण का किया गया है। हर घर तक सड़क की कनेक्टिवटी है। आरसीसी नालियां बनाई गई हैं। चारों प्राथमिक विद्यालयों का कायाकल्प किया गया है। उप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया है। तीन शमशान घाट बनवाए। गांव में सात स्वयं सहायता समूह चलवाए गएं हैं जिनके माध्यम से महिलाओं को रोजगार दिया गया। इस गांव ने सभी नौ विषयों में आवेदन किया था। प्रधान कहती हैं कि सभी नौ उप निदेशकों ने ही उनके यहां आकर गांव को कसौटी पर परखा। उन्होंने कहा कि गांव में अभी और विकास करने हैं।
मध्यप्रदेश, गुजरात और बिहार इस पुरस्कार में खाली हाथ रह गए हैं। उप्र के दो गांवों को दो पुरस्कार मिले हैं। पंचायती राज विभाग लगातार गांवों में विकास के लिए काम कर रहा है। सबसे हर्ष की बात यह है कि सिद्धार्थनगर जैसे आकांक्षात्मक (अति पिछड़ों में शामिल) जिले के एक गांव ने सफलता की नई इबारत लिखी है। इससे अन्य को भी प्रेरणा मिलेगी। - प्रवीणा चौधरी संयुक्त निदेशक पंचायती राज विभाग
यह रही प्रक्रिया
- 09 विषय पर 421669 आवेदन किए
- समिति ने 773 विकास खंडों की 7765 ग्राम पंचायतों को जिला स्तर पर भेजा
- जिला परफारमेंस असेसमेंट समिति ने 73 जिलों की 888 ग्राम पंचायतें चुनें
- राष्ट्रीय स्तर पर 27 ग्राम पंचायतों के आवेदन भेजे गए
- हंसुड़ी औसानपुर विकासखंड भनवापुर को 50 लाख रुपये का पुरस्कार
- मिलक अमावती विकास खंड डिलारी को एक करोड़ रुपये का पुरस्कार