ऊंचाहार (रायबरेली)। बकुलाही झील के अभिशाप से धमोली ग्राम पंचायत भी अछूती नहीं है। उसके सीपेज ने गांव के किसानों की आय का सहारा छीन लिया है। शहर जाकर मजदूरी करना किसानों की मजबूरी बन गई है। किसानों को सरकारी सहायता न मिलने से परिवार चलाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
यह ग्राम पंचायत रोहनिया ब्लाॅक मुख्यालय से लगभग पांच किमी. दूर है। इस ग्राम पंचायत की आबादी लगभग 2,500 है। ग्राम पंचायत के धमौली, पूरे नेवाजी, नेकनामपुर, सिकंदराबाद, पट्टीपीठा गांव में लगभग 800 किसानों की रोजी-रोटी का सहारा खेती है। वहीं, 40 वर्षों से बकुलाही नदी की जलधारा रुकी तो नदी झील में बदल गई और इसने किसानों से खेती का सहारा छीन लिया।
गांव के किसानों की लगभग 165 बीघा खेती योग्य जमीन नदी के पानी से जलमग्न है। उसपर खेती नहीं हो रही है। चार दशक पहले किसान इस नदी के पानी से फसल की सिंचाई करते थे और खुशहाल थे। जमीन से मोटा अनाज ज्वार बाजरा, उड़द, मूंग पैदा होता था। गेहूं व धान की भी फसल होती थी। कुछ किसान सब्जी की भी खेती करते थे। लेकिन वरदान साबित हो रही नदी ने किसानों को भुखमरी की ओर धकेल दिया। जमीनों का अधिकांश भाग जलमग्न हो गया। झील के कारण जमीन भी सीपेज की चपेट में आ गई और फसलों की पैदावार घट गई। लगभग 20 वर्ष पहले किसानों ने इसके लिए आवाज उठाई, लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की।
झील की सफाई हो तो लौट आएंगे अच्छे दिन
गांव के किसान गणेश साहू, बैजनाथ, रंजीत सिंह, बाबूलाल, श्रीराम, रामफेर, अरविन्द, राम किशुन छविनाथ ने बताया कि बकुलाही नदी की सफाई न होने से उनकी रोजी-रोटी छिन गई। खेतों में फसल पैदा नहीं होती। आखिर हम लोग क्या करें। महंगाई की मार अलग पड़ रही है। सीपेज की समस्या को जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारी तक जानते हैं, लेकिन किसी ने इस समस्या से निजात दिलाने की पहल नहीं की। कई बार शिकायत भी की गई। लेकिन हमेशा आश्वासन ही मिला। धरातल पर कुछ नहीं हुआ। किसानों ने कहा कि यदि बकुलाही की सफाई हो जाए तो रोहनिया ब्लाक के किसानों की समृद्धि लौट आएगी।