बालक को खाता मगरमच्छ, सुनील की फाइल फोटो।
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तिकुरी गांव निवासी अनिल सिंह, जिन्होंने साहस दिखाते हुए नदी से सुनील का शव बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई, ने बताया कि मगरमच्छ बेहद ताकतवर था। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने मछली पकड़ने वाला जाल मगरमच्छ की ओर फेंका तो वह पहले जाल में ही उलझ गया। कुछ देर तक मगरमच्छ और जाल के बीच खींचतान होती रही। आखिरकार मगरमच्छ शव छोड़कर गहरे पानी में चला गया। इसके बाद ग्रामीणों और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की मदद से जाल के सहारे सुनील के शव को धीरे-धीरे किनारे तक खींचकर बाहर निकाला गया। अनिल ने बताया कि यह बेहद भयावह और दिल दहला देने वाला मंजर था, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
बहराइच में मगरमछ का हमला।
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सुनील पहले से ही अनाथ था। ग्रामीणों के अनुसार उसकी मां का सात वर्ष पहले और पिता का पांच वर्ष पहले बीमारी से निधन हो चुका था। अब परिवार में 14 वर्षीय बहन सुमन, 10 वर्षीय भाई संजय और सात वर्षीय बहन सीमा ही बचे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है। सिर्फ चाचा का ही सहारा है। घटना के बाद गांव के लोग बच्चों की मदद के लिए आगे आने लगे हैं और चंदा भी एकत्र किया जा रहा है।
गांव में दहशत, वन विभाग ने जारी किया अलर्ट
घटना के बाद तिंकुरी और आसपास के गांवों में भय का माहौल है। किसान नदी किनारे खेतों में जाने से डर रहे हैं। वन क्षेत्राधिकारी मोहम्मद शाकिब ने बताया कि सरयू किनारे बसे गांवों में मुनादी कराकर लोगों को नदी से दूर रहने की चेतावनी दी जा रही है। मगरमच्छ को पकड़ने के लिए जाल लगाने, अतिरिक्त गश्त बढ़ाने और चेतावनी बोर्ड लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।