पूर्वांचल की चुनावी जंग को बागी भी रोमांचक बना रहे हैं। कई सीटों पर वे चुनावी गणित बना-बिगाड़ सकते हैं। कहीं वे पार्टी से बगावत करके चुनाव लड़ रहे हैं, तो कहीं पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ काम कर रहे हैं। पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते सपा व भाजपा ने कई नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इसके बावजूद भितरघात की आशंका बनी हुई है।
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विधानसभा चुनाव के दौरान और इससे पहले पूर्वांचल में कई बड़े नेता दलबदल करके इधर से उधर जा चुके हैं। यह दलबदल लगभग सभी दलों में हुआ है।
भाजपा में शामिल होने वालों की तादाद अपेक्षाकृत ज्यादा रही तो टिकट वितरण में असंतोष भी उसी में ज्यादा रहा। भाजपा में कहीं दूसरे दलों से आए नेताओं को प्रत्याशी बनाए जाने का विरोध है तो कहीं अपने जमीनी नेताओं की अनदेखी से नाराजगी है। कमोबेश यही स्थिति सभी दलों में है।
टिकट कटने पर बगावत को कहीं विरोध
गाजीपुर के सपा विधायक और पूर्व मंत्री विजय मिश्रा टिकट कटने पर बगावत कर गए। वे चुनाव तो नहीं लड़ रहे लेकिन बसपा में शामिल हो गए हैं। इसी तरह जहूराबाद सीट से सैयदा शादाब फातिमा का टिकट काटे जाने का भी विरोध है।
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सपा छोड़ बसपा से लड़ रहे हैं चुनाव
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
बलिया में पूर्व मंत्री नारद राय और अंबिका चौधरी सपा छोड़कर बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं। बलिया की बांसडीह सीट पर बगावत करके चुनाव लड़ने वाले नीरज सिंह गुड्डू को भी पार्टी से बाहर कर दिया गया है। इस सीट पर मंत्री रामगोविंद चौधरी चुनाव लड़ रहे हैं।
नाराजगी खिलाएगी गुल
भदोही सीट से बाहुबली सपा विधायक विजय मिश्रा भी बागी होकर निषाद पार्टी से इसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। सपा ने मिश्रा के साथ ही उनकी एमएलसी पत्नी रामलली मिश्र व अन्य नेताओं को निकाल चुकी है।
आजमगढ़ में गोपालपुर सीट पर मंत्री वसीम अहमद का टिकट काटकर नफीस अहमद को प्रत्याशी बनाए जाने से भी कुछ लोगों में नाराजगी है। गोरखपुर ग्रामीण से दो बार विधायक रहे भाजपा के विजय बहादुर यादव इस बार भाजपा छोड़कर सपा के टिकट पर मैदान में हैं। यादव के साथ क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं की टीम भी सपा में चली गई है।
ये है कार्यकर्ताओं का हाल
आजमगढ़ की मेहनगर सीट से सपा प्रत्याशी कल्पनाथ पहले भाजपा में थे। क्षेत्र में वर्षों तक भगवा फहराने के बाद टिकट न मिलने के कारण वे सपा खेमे में शामिल हो गए। दीदारगंज से भाजपा प्रत्याशी कृष्ण मुरारी बसपा छोड़कर आए हैं। कई कार्यकर्ता उनका विरोध कर रहे हैं।
महराजगंज जिले की सिसवां सीट से बसपा प्रत्याशी रहे प्रेमसागर पटेल का भाजपा ने टिकट दिया है। वहीं सपा ने भी पूर्व में भाजपा से विधायक रहे शिवेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाया है। यहां भाजपा के बागी राकेश मिश्र भी परेशानी खड़ी कर रहे हैं। देवरिया जिले की सलेमपुर सीट पर भाजपा ने काली प्रसाद को प्रत्याशी बनाया है।
2012 में यहां से भाजपा प्रत्याशी रही विजय लक्ष्मी अब सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रही हैं। इंटर कॉलेज संचालक काली प्रसाद को टिकट देकर दावेदारों की अनदेखी करने से कार्यकर्ताओं में रोष व्याप्त है।
बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए दिग्गज नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को भाजपा ने पडरौना सीट से प्रत्याशी बनाया है। पडरौना से भाजपा के बागी परशुराम मिश्र मौर्य के सामने चुनाव लड़ रहे हैं। पार्टी ने मिश्र को छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है।
बाहर का रास्ता दिखाया, पर कांटे फिर भी कम नहीं
- फोटो : demo pic
आजमगढ़ जिले की फूलपुर पवई विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी अरुण यादव की खिलाफत में चुनाव मैदान में राम सूरत राजभर हैं। दीदारगंज सीट से भाजपा प्रत्याशी कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा का खिलाफत कर रहे रणविजय सिंह चौधरी, अर्चना यादव से भी भाजपा की मुसीबत बढ़ी है।
बलिया जिले की बांसडीह सीट से गठबंधन प्रत्याशी अरविंद राजभर को भाजपा की केतकी सिंह टक्कर दे रही हैं। सिकंदरपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के संजय यादव को पार्टी के बागी अरविंद राय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तमकुहीराज कुशीनगर से भाजपा प्रत्याशी जगदीश मिश्रा के सामने टिकट न मिलने से नाराज नंद किशोर मिश्र और श्रीकांत मिश्र बगावत पर उतर आए हैं। पार्टी ने चंद्रकांत और श्रीकांत को निष्कासित कर दिया है।
बसपा विधायक को टिकट देने से भाजपाई नाराज
भदोही में बसपा के पूर्व विधायक रवींद्रनाथ त्रिपाठी को भाजपा प्रत्याशी बनाने से पार्टी का काडर खफा है। जौनपुर जिले की बदलापुर सीट से भाजपा ने रमेश मिश्रा को टिकट दिया है।
मिश्रा 2012 में मुंगराबादशाहपुर से बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडे़ थे। मिश्रा को टिकट देने से बदलापुर के भाजपाई खफा थे।
सोनभद्र सीट जिले की घोरावल सीट से भाजपा ने राजगढ़ से दो बार बसपा विधायक रहे अनिल मौर्य को टिकट दिया है।
मौर्य को बाहरी बताते हुए टिकट न मिलने से खफा कई भाजपा कार्यकर्ता भितरघात में जुटे हैं। कुछ ऐसा ही हाल चंदौली की चकिया सीट का भी है।
वाराणसी में बागियों ने ही मुश्किल की भाजपा की राह
पीएम नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में भी भाजपा को बागियों का सामना करना पड़ रहा है। वाराणसी दक्षिणी सीट से विधायक श्याम देव राय चौधरी ‘दादा’ का टिकट काटने से उनके समर्थक नाराज हैं।
वे भाजपा प्रत्याशी की खिलाफत कर रहे हैं, दादा भी सक्रिय नहीं हैं। रोहनिया सीट से भाजपा-अपना दल के संयुक्त प्रत्याशी सुरेंद्र नारायण सिंह चुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की मां कृष्णा पटेल मुसीबत बनी हुई हैं।
वह बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। अजगरा सीट पर भाजपा-भासपा के संयुक्त प्रत्याशी कैलाश नाथ सोनकर के खिलाफ भी भाजपा का एक खेमा विरोध का बिगुल बजा रहा है।
बसपा के कई बड़े नेता पाला बदल करके भाजपा में जा चुके हैं। चुनाव के समय भी कई नेता इधर से उधर हो गए। बसपा ने कई सीटों पर प्रत्याशी बदले हैं। इससे भी कई नेता, खासतौर से पूर्व घोषित प्रत्याशी और उनके समर्थक नाराज हैं।
यह स्थिति मऊ, मोहम्मदाबाद में खासतौर पर दिख रही है। इन सीटों पर बसपा ने माफिया मुख्तार अंसारी और उनके भाई सिगबतुल्ला अंसारी को टिकट दिया है।
बलिया की फेफना सीट से अंबिका चौधरी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद बसपा के पहले से घोषित प्रत्याशी अभिराम सिंह सपा में चले गए हैं। देवरिया में रामपुर कारखाना समेत कई सीटों पर बसपा से टिकट कटने वाले कई प्रत्याशी भितरघात कर सकते हैं।