फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नई सरकार की आहट के साथ शुरू हो गई गड़बड़ियों की जांच, कार्रवाई तेज

Mon, 06 Mar 2017 11:33 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
जांच - फोटो : demopic
विज्ञापन
प्रदेश में कागज पर फोरलेन रोड बनाकर करोड़ों का घपला करने का मामला उजागर हुए ज्यादा दिन नहीं हुए हैं। निर्माण कार्य से जुड़े विभागों में सरकारी कायदे-कानून को ताक पर रखकर मनमानी कामकाज और खजाने को नुकसान पहुंचाने के  कई दूसरे मामले भी सामने आए हैं। 
विज्ञापन


नई सरकार के लिए चुनावी गहमागहमी के बीच संबंधित महकमों के स्तर पर इन मामलों में तेजी से जांच-पड़ताल और कार्रवाई हो रही है।

हाल में लोक निर्माण, ग्रामीण अभियंत्रण व लघु सिंचाई जैसे विभागों ने कई मामलों में जांच-पड़ताल व कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। विभागों में कई ऐसी अनियिमतताएं सामने आई हैं जो किसी भी दशा में नहीं होनी चाहिए। 

मसलन, एक  काम को दो-दो योजना से मंजूरी, तकनीकी स्वीकृति से अधिक बजट की स्वीकृति, एस्टीमेट मंजूरी में कायदे-कानून की अनदेखी जैसे मामले गंभीर सवाल खड़ा करते हैं। ऐसे कई मामलों में जांच के आदेश दिए गए हैं। कई मामलों में अफसरों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी तय की गई है और विभागीय जांच शुरू करा दी गई है।
विज्ञापन

एक ही काम को दो-दो योजना से मंजूरी, एक मद का आदेश निरस्त

डेमो प‌िक
नियम है कि कोई निर्माण कार्य किसी एक योजना से स्वीकृत होने के बाद उसे दूसरी योजना से स्वीकृत नहीं किया जाएगा। लेकिन कई जिलों में एक योजना से काम मंजूर होने के बाद उसी काम को दूसरी योजना से मंजूरी दे दी गई। 

यही नहीं, ऐसी परियोजनाओं से जुड़े कार्य के लिए अनुमानित लागत का बड़ा हिस्सा जारी भी कर दिया गया। कई परियोजनाओं के लिए पूरी की पूरी रकम एक ही किस्त में आवंटित कर दी गई। 

लोक निर्माण विभाग ने डॉ. राम मनोहर लोहिया पुनर्निर्माण योजना के तहत बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, कौशांबी व बरेली की पांच तथा अनजुड़ी बसावट योजनांतर्गत कन्नौज की ऐसी तीन परियोजनाओं को अनुदान संख्या-58 के अंतर्गत मंजूरी दी जो दूसरी योजना में स्वीकृत हो चुकी हैं। अब अनुदान-58 के तहत दी गई स्वीकृति निरस्त कर दी गई है।

पहले ज्यादा बजट का आवंटन अब रकम सरेंडर

डेमो प‌िक
चालू वित्त वर्ष में जिला मुख्यालय को चार लेन से जोडे़ जाने की योजना के तहत इटावा में कार्य होना था। इटावा में इटावा-मैनपुरी के किमी राजमार्ग दो से चार लेन चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण तथा सैफई तहसील में फोरलेन सैफई उपमार्ग का काम होना था। 

चूंकि यह वीवीआईपी जिला था, लिहाजा काम के लिए तकनीकी स्वीकृति की प्रतीक्षा की भी जरूरत नहीं समझी गई और 27.88 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए गए। तकनीकी स्वीकृति में पता चला कि आवंटित रकम 2.35 करोड़ रुपये ज्यादा थी। लोक निर्माण विभाग ने अब इस रकम को सरेंडर कर दिया है।
 
चित्रकूट में 22 गांवों में सड़कों का काम होना था। इसकेलिए एस्टीमेट को तकनीकी स्वीकृति दी जानी थी। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के इंजीनियर ने 12 गांवों के काम के लिए सीमेंट का रेट अधिक दरों पर स्वीकृत कर दिया। इससे खजाने को 5,94,273 रुपये की चपत लगी। 

अब इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसी तरह मैनपुरी में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी दी गई थी। विभाग के इंजीनियरों ने तकनीकी एस्टीमेट की स्वीकृति में गंभीर अनियमितता की। 

प्रथम दृष्टया जांच में सरकारी खजाने को 3,44,577 रुपये का नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई है। अब वहां के तत्कालीन अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हुए जांच बैठा दी गई है। 
विज्ञापन

महालेखाकार ने पकड़ा 15.62 लाख का घपला, जांच शुरू

डेमो प‌िक
फिरोजाबाद में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के कुछ निर्माण कार्यों की महालेखाकार की टीम ने ऑडिट की। जांच में पता चला कि 15,62,108 रुपये अधिक खर्च किया गया था। इसके लिए तत्कालीन अधिशासी अभियंता को जिम्मेदार ठहराया गया था। शासन ने एक मार्च को इंजीनियर के खिलाफ  विभागीय जांच बैठा दी है।
 
ब्लास्ट कूप निर्माण में भी मनमानी, जांच होगी
इलाहाबद के मेजा विकास खंड में नए ब्लास्ट कूप के निर्माण व कुओं के जीर्णोद्धार का काम होना था। इन कामों में गंभीर अनियमितता सामने आई। लघु सिंचाई विभाग ने प्रथम दृष्टया प्रकरण में दोषी पाए गए तत्कालीन सहायक अभियंता व अवर अभियंता के खिलाफ जांच बैठा दी है।
 
जांच अधिकारी भी बदले
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के बाराबंकी प्रखंड कार्यालय परिसर में लगे पेड़ कटवा लिए गए थे। अनियमित ढंग से पेड़ कटवाने के मामले में तत्कालीन अधिशासी अभियंता व तत्कालीन सहायक अभियंता स्टोर पहली नजर में ही उत्तरदायी माने गए। इनके खिलाफ जांच बैठा दी गई, मगर अब जांच अधिकारी बदल दिए गए हैं।

सड़कों के निर्माण में मनमानी की भी जांच
उन्नाव में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के पैकेज संख्या-यूपी 69101 के अंतर्गत सीसी रोड निर्माण में जांच की मांग हो रही थी। बस्ती में आरईएस केएक अवर अभियंता केपास कई ब्लाकों की जिम्मेदारी है। इनके पूरे कार्यकाल में हुए कार्यों की जांच की मांग हो रही थी। फैजाबाद में डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना के अंतर्गत सड़क निर्माण में कमीशन लेकर बंदरबांट करने तथा घटिया सड़क निर्माण तथा यहीं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के पैकेज संख्या यूपी-2373 से 2375 के निर्माण कार्यों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की गई थी। शासन ने इन सभी मामलों में टीएसी या अन्य जरूरी जांच का आदेश कर दिया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें