यूपी बोर्ड की ओर से परीक्षा में नकल रोकने के लिए शासन और कोर्ट की सख्ती का असर दिखाई पड़ा है। अबकी रिजल्ट में नकल कराने वालों के लिए गढ़ कहे जाने वाले गाजीपुर, एटा, मिर्जाप़ुर, कासगंज, हरदोई जैसे जिले बोर्ड की ओर से जारी सूची में अंतिम पायदान पर पहुंच गए हैं।
बोर्ड की सख्ती का असर रहा कि इस बार पिछले वर्ष की अपेक्षा परिणाम आगे नहीं बढ़ सका बल्कि इंटरमीडिएट में ३.३८ फीसदी और हाईस्कूल का परिणाम १.५७ फीसदी कम हो गया।
जिन जिलों से अधिक फर्जी परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, पूरी परीक्षा के दौरान नकल का बोलबाला रहा, वहां के नतीजे सामान्य रहे। नकलमंडी के लिए बदनाम जिले प्रदेश की लिस्ट में फिसड्डी साबित हुए।
फर्जी छात्रों को परीक्षा से रोकने में नाकाम माध्यमिक शिक्षा विभाग ने नकल माफिया का जाल तोडऩे के लिए मूल्यांकन का डंडा चलाया।
अपनाया गया विशेष मूल्यांकन का फॉर्मूला
सूत्रों की माने तो ऐसे जिले जहां बड़े पैमाने पर फर्जी दाखिले और नकल की शिकायत थी, वहां के लिए 'विशेष मूल्यांकन का फार्मूला अपनाया गया।
जिन स्कूलों के बारे में बोर्ड के पास शिकायत थी, वहां पांच से दस कापियों के जबाव एक जैसे दिखे तो कॉमन मार्किंग करा दी गई। नतीजा रहा कि गाजीपुर, एटा, मिर्जापुर, कासगंज, हरदोई, मऊ, मुरादाबाद, कौशांबी जैसे जिलों के नतीजे सामान्य रहे।
मूल्यांकन में बोर्ड की उदारता के बावजूद नकलमंडी के रूप में चर्चित कौशांबी, प्रदेश में सबसे निचले पायदान पर रहा। इसी तरह गाजीपुर नीचे से दूसरे यानी प्रदेश में ७४वें और हरदोई ७३ वें स्थान पर रहा।
बोर्ड के अधिकारी के मुताबिक परीक्षा में सबसे अधिक नकल गाजीपुर, मथुरा, देवरिया और एटा में हुई। इन जिलों से यह शिकायत भी रही कि नकलमाफिया ने बड़े पैमाने पर कापियां बदलवा दीं लेकिन इसके बाद भी वहां के नतीजे औरों के मुकाबले काफी कम रहे।