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लखनऊ में डकैतों का आतंक, पीजीआई के बाद गोमतीनगर में परिवार को बंधक बनाकर डकैती

Fri, 14 Jul 2017 02:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ में पीजीआई में सोमवार रात हुई डकैती का खुलासा भी नहीं हो पाया था कि बेखौफ बदमाशों ने राजधानी के पॉश इलाके गोमतीनगर के विवेक खंड-एक में एक और सनसनीखेज वारदात को अंजाम देकर खाकी को चुनौती दे डाली। तमंचे-चाकू से लैस डकैतों ने बिजली विभाग के रिटायर्ड इंजीनियर गिरीश पांडेय के घर पर करीब 45 मिनट तक तांडव मचाया।

पांच-छह की संख्या में आए बदमाशों ने परिवार के लोगों को बंधक बनाकर मारा-पीटा। विरोध करने पर रिटायर्ड इंजीनियर के हाथों में चाकू घोंप दिया। बेटे के सिर पर तमंचे की बट मारकर लहूलुहान कर दिया और छह लाख रुपये नकद व दो लाख रुपये के जेवरात ले गए। भागते समय वे कमरों की चाबियां भी साथ ले गए। पीड़ितों ने किसी तरह शोर मचाकर लोगों को वारदात की सूचना दी। इस मामले में केस दर्ज कर डकैतों की तलाश की जा रही है।
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गोमतीनगर के एसओ विश्वजीत सिंह के अनुसार, मूल रूप से गोरखपुर के बड़हलगंज सिधुआपार निवासी गिरीश और उनकी पत्नी मंजू बुधवार रात अपने कमरे में सो रहे थे। बेटे सुशांत, प्रशांत और बहू फर्स्ट फ्लोर पर अपने-अपने कमरों में लेटे थे। उनके पोते दूसरे कमरे में नौकरानी दीपिका के साथ सो रहे थे। दुबई में रहने वाली बेटी बरखा भी फर्स्ट फ्लोर स्थित कमरे में सो रही थी। इसी दौरान बदमाशों ने इस वारदात को अंजाम दिया।
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45 मिनट तक दहशत...
खिड़की के पेंच खोलकर ड्राइंग रूम से घुसे, चाकू से हमला, चादर फाड़कर हाथ-पैर बांधे
बदमाश रात करीब पौने तीन बजे ड्राइंग रूम की खिड़की खोलकर गिरीश के कमरे में घुसे। इसी बीच उनकी पत्नी की नींद खुल गए। उन्होंने चिल्लाने की कोशिश की तो बदमाशों ने मुंह दबाकर तमंचा तान दिया। शोर सुनकर गिरीश उठे और बदमाशों से भिड़ गए। तब एक बदमाश ने उनके दोनों हाथों में चाकू मारकर घायल कर दिया। बदमाशों ने चादरें फाड़कर दोनों के हाथ-पैर बांध दिए और बगल के कमरे में रखी आलमारियों व सामान की तलाशी लेने गए।

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बच्चों को भी नहीं छोड़ा
कुछ बदमाश फर्स्ट फ्लोर पर प्रशांत के कमरे में घुसे। वहां उसे और उसकी पत्नी को भी बंधक बनाकर पीटा। तमंचे की बट मारकर प्रशांत का सिर फोड़ दिया और जेवर-नकदी समेट लिए। बरखा, दो बच्चों और नौकरानी दीपिका को भी बंधक बना लिया। फिर सभी को अलग-अलग कमरों में बंद किया और साढ़े तीन बजे के आसपास कमरों की चाबियां लेकर भाग गए। करीब आधे घंटे बाद प्रशांत अपने कमरे की बालकनी से निकलकर छत पर गए और शोर मचाया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग एकत्र हो गए। पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई।
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एसटीएफ भी डकैतों की तलाश में, मजदूरों से पूछताछ
वारदात की सूचना पाकर एसएसपी दीपक कुमार, आईजी रेंज जयनारायन सिंह, एडीजी जोन अभय कुमार प्रसाद, एएसपी उत्तरी अनुराग वत्स सहित क्राइम ब्रांच, सर्विलांस, डॉग स्क्वॉयड और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। एसएसपी ने बताया कि गिरीश की तरफ से एफआईआर दर्ज करके डकैतों की तलाश की जा रही है। एसटीएफ को भी लगाया गया है। घटनास्थल के पास एक मकान बन रहा है। वहां काम कर रहे 10-12 मजदूरों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
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तीन वारदात... सभी एक जैसी
रिटायर्ड इंजीनियर के घर से चंद कदम दूर रियल एस्टेट कारोबारी के घर पर दो महीने पहले डकैती पड़ी थी। डकैती का तरीका भी पीजीआई और विवेक खंड एक में पूर्व में पड़ी डकैती जैसा ही है।
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पड़ोस के खाली प्लॉट से भीतर घुसे थे बदमाश
गिरीश पांडेय का मकान रेलवे ट्रैक से चंद कदम दूर है। बदमाश रेलवे ट्रैक की तरफ से आए और उनके मकान के बगल में खाली प्लॉट में घुस गए। वहीं से गिरीश के मकान की बाउंड्रीवाल फांदकर भीतर गए थे। वारदात के बाद वे इसी रास्ते से भाग निकले।

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 बाहर गश्त करती रहीं पुलिस, अंदर डकैत खंगाल रहे थे घर दो महीने पहले विवेक खंड और विराम खंड में डकैती के बाद गोमतीनगर पुलिस ने वीवीआई कॉलोनियों में देर रात तक गश्त करनी शुरू करनी दी है। इसके बावजूद वे इस वारदात को नहीं रोक पाए। गिरीश के घर में रात करीब 2:45 बजे से 3:30 बजे तक बदमाश कोना-कोना खंगाल रहे थे, उस वक्त भी पुलिस कॉलोनी में गश्त कर रही थी। फिर भी उसे भनक तक नहीं लग सकी। कॉलोनी में रेलवे स्टेशन की तरफ वाले गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे में भी पुलिस के लगातार गश्त करने की पुष्टि हुई है।
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रात करीब 3:20 बजे गोमतीनगर पुलिस का बाइक दस्ता कॉलोनी के घरों के सामने से होकर गुजरा। उन्होंने कॉलोनी के सिक्योरिटी गार्ड से बातचीत भी की। रात करीब 3:40 बजे पुलिस की जीप कॉलोनी में दाखिल हुई। जीप गिरीश के मकान केपास लगे गेट तक गई। वहां से लौटते समय पार्क के पास टहल रहे गार्ड से पूछताछ की। डकैत वारदात करने के बाद दोनों गश्त के बीच ही बाहर निकल गए। कॉलोनी में रात करीब तीन बजे एक संदिग्ध बोलेरो भी घुसी थी। वह पार्क के पास सीधे कॉलोनी में दाखिल हुई। फिर तत्काल लौट गई।
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