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भुट्टे के सूप का स्टेंट डालकर खोल दिया दिल का ब्लॉकेज

Sat, 21 May 2016 11:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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डॉक्टरों की टीम - फोटो : amar ujala
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लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने बेबी कॉर्न (भुट्टे) के सूप से बने स्टेंट लगाकर शुक्रवार को दो मरीजों के दिल के ब्लॉकेज को खोल दिया। डॉक्टरों का दावा है कि अब इन मरीजों को बाईपास सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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यही नहीं यह स्टेंट छह महीने से लेकर डेढ़ साल में गल जाता है, जिसके बाद मरीज को खून पतला करने की दवा खाने की भी जरूरत नहीं पड़ती। स्टेंट लगाने के लिए चीरा भी नहीं लगाना पड़ता जिससे मरीज दो दिन में ही अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाता है। 

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. भुवन चंद्र तिवारी और डॉ. नवीन जांबवाल की टीम ने यह खास स्टेंट मरीजों को लगाया। डॉ. भुवन के मुताबिक दिल में ब्लॉकेज की शिकायत लेकर दोनों मरीज संस्थान पहुंचे। 
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जांच में पता चला कि दोनों मरीजों की धमनियां तीन महीने से पूरी तरह से बंद थीं। चिकित्सकीय भाषा में कहें तो दोनों मरीज क्रॉनिक टोटल ऑक्ल्यूजन के शिकार थे।

स्टेंट होता क्या है?

स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें फौरन घुमारवीं अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां ममता ने दम तोड़ दिया - फोटो : Demo pic
आसान शब्दों में कहें तो स्टेंट एक ट्यूब जैसी संरचना होती है। इसका इस्तेमाल ब्लॉक हो चुकी धमनी को खोलने के लिए किया जाता है। 

आम स्टेंट कोबाल्ट और क्रोमियम के बने होते हैं। ये मेटालिक स्टेंट मरीज को लगाने के बाद उसे हमेशा खून पतला करने की दवा खानी पड़ती है। जबकि बेबी कॉर्न सूप से बनाया गया स्टेंट यानी बायो एब्जार्बेबल वैस्कुलर स्टेंट बेहद नाजुक होता है।
 
लगाने के छह माह से लेकर डेढ़ साल में अपने आप गल जाते हैं। इसके बाद मरीज को खून पतला करने की दवा खाने की जरूरत नहीं पड़ती।

एब्जॉर्बेबल स्टेंट सभी हृदय रोगियों में नहीं डाला जा सकता है। डॉ. भुवन के मुताबिक जिन मरीजों की धमनियां मोटी होती हैं और उनमें पर्याप्त मात्रा में जगह होती है, उन्हीं में ये स्टेंट डाला जाता है। 

इस स्टेंट को डालते वक्त बहुत सावधानी बरती जाती है क्योंकि जरा सी चूक से स्टेंट खराब हो जाता है और डेढ़ लाख रुपये का नुकसान हो जाता है।
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जापान के डॉक्टरों ने संस्थान में लिया प्रशिक्षण

डॉक्टरों की टीम - फोटो : amar ujala
ये स्टेंट नए हैं या नहीं ये तो नहीं कह सकते पर यहां यह पहली बार इस्तेमाल हुआ। इस तरह का स्टेंट अमेरिका, इंग्लैंड और अपने देश के कुछ सेंटर पर लगाए जाते हैं।

डॉ. भुवन के मुताबिक संस्थान में एब्जॉर्बेबल स्टेंट लगाने का खर्च करीब डेढ़ लाख रुपये आता है। निजी सेंटर में इस तरह के स्टेंट से ब्लॉकेज खुलवाने के लिए मरीज को चार लाख रुपये से ज्यादा खर्च करना पड़ता है। 

सामान्य तौर पर एंजियोप्लास्टी में मेटालिक स्टेंट डाला जाता है। निजी सेंटर पर इस तरह का स्टेंट लगाने पर एक लाख रुपये से अधिक का खर्च आता है।

जापान में पहले इस तकनीक से एंजियोप्लास्टी करने की अनुमति नहीं थी। अब वहां की सरकार ने भी इसे हरी झंडी दे दी है। विशेषज्ञ डॉ. साई सी केई और यो सिमी ओटा कैथ लैब में मौजूद रहे और एब्जॉर्बेबल स्टेंट डालने की तरकीब को संस्थान के डॉक्टरों की मदद से सीखा।
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