फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस मामले में आरोपियों का सरेंडर, जमानत मिली

Sat, 20 May 2017 11:52 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
वेदांती
विज्ञापन
बाबरी केस में लखनऊ में रामविलास वेदांती समेत पांच लोगों ने स्पेशल सीबीआई कोर्ट में शन‌िवार को सरेंडर क‌िया। वेदांती के अलावा चम्पत राय, बीएल शर्मा, महंत नृत्य गोपालदास और धरम दास शामिल रहे। सभी सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में एक समन के बाद पहुंचे थे। कोर्ट ने पांचों आरोपियों को 20-20 के मुचलके पर जमानत दे दी है। सतीश प्रधान खराब स्वास्थ्य के चलते नहीं पेश हुए थे।
विज्ञापन


बता दें क‌ि सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी विध्यवंस मामले में सुनवाई के दौरान फैसला दिया था बीजेपी के वरिष्ठ नेता आडवाणी, जोशी, कल्याण सिंह सहित भाजपा और विश्व हिंदू परिषद के 13 नेताओं पर आपराधिक साजिश के तहत मुकदमा चलेगा। 

सीबीआई ने कोर्ट में अपील की थी कि इन नेताओं पर आपराधिक साजिश रचने के तहत मुकदमा चलाई जाए। सीबीआई की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने मान ली थी। इस केस लखनऊ सेशन कोर्ट में चल रहा है। अगली सुनवाई में भाजपा के वर‌िष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी भी आ सकते हैं।
विज्ञापन


बीते छह अप्रैल को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने कहा था कि इस तरह के मामले में इंसाफ के लिए हमें दखल देना होगा। यह देखते हुए तकनीकी कारणों से आडवाणी सहित इन नेताओं पर लगे आपराधिक षड्यंत्र के आरोप हटाए गए थे, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था हम इसके लिए संविधान के अनुच्छेद-142 (सुप्रीम कोर्ट को मिले विशेषाधिकार) का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी सवाल किया था कि इस मामले में एक ही षडयंत्र हैं तो इसके लिए दो अलग-अलग ट्रायल क्यों? पीठ ने कहा था कि हम हाईकोर्ट से यह कह सकते हैं कि वह इस मामले के संयुक्त ट्रायल के लिए एक जज को नियुक्त करें, जो समयबद्ध तरीके से सुनवाई करें, जिससे कि इस मामले की सुनवाई दो वर्षों में पूरी हो सके।
विज्ञापन

आडवाणी पर भीड़ को उकसाने का केस

लालकृष्ण आडवाणी
मालूम हो कि आडवाणी सहित अन्य नेताओं पर रायबरेली की अदालत में भीड़ को उकसाने का मामला चल रहा है जबकि लखनऊ की विशेष अदालत में कार सेवकों पर षड्यंत्र और विवादित ढांचे को ढहाने का।

सीबीआई की ओर से दलील दी गई थी कि इन 13 नेताओं के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र का मुकदमा चलना चाहिए। वहीं आडवाणी और जोशी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल ने संयुक्त ट्रायल के आइडिया का विरोध किया था। उनका कहना था कि सीआरपीसी केतहत ऐसा नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि  इस तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल नहीं कर सकता क्योंकि यह आरोपियों के जीवन जीने और स्वतंत्रता केमूल अधिकार से जुड़ा मामला है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें