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UP News: बीफार्मा-डीफार्मा कॉलेजों की संबद्धता और एनओसी की होगी जांच, जिलास्तर पर जांच कमेटी गठित

Tue, 11 Apr 2023 11:20 AM IST
ishwar ashish अक्षय कुमार, अमर उजाला, लखनऊ

सार

यूपी सरकार ने वर्ष 2022-23 व 23-24 में स्थापित होने वाले बीफार्मा-डीफार्मा कॉलेजों की संबद्धता और एनओसी की जांच का फरमान जारी किया है। इस संबंध में जिलाधिकारी संस्तुति के साथ शासन को रिपोर्ट देंगे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले एक वर्ष में स्थापित होने वाले बीफार्मा व डीफार्मा संस्थानों की संबद्धता व अनापत्ति दस्तावेजों की जांच कराने का फैसला किया है। इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों के लिए अलग-अलग जांच कमेटियों का गठन कर दिया गया है। अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री एसपी गोयल ने जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि कॉलेजों की मानक के अनुसार संबद्धता व अनापत्ति की जांच करवाकर रिपोर्ट अपनी संस्तुति से भेजें।

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सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों उच्च स्तर पर फार्मेसी संस्थानों की संबद्धता व एनओसी दिए जाने में मानकों को नजरंदाज किए जाने की शिकायत की गई थी। इसके बाद 2022-23 में एकेटीयू के स्तर से जारी की गई संबद्धता व 2023-24 के लिए शासन द्वारा जारी की गई एनओसी का सत्यापन कराने का फैसला हुआ। 2023-24 में कॉलेजों के संचालन के लिए शासन स्तर से एनओसी दी गई है, जिससे कि कॉलेज फॉर्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के समक्ष मान्यता के लिए आवेदन कर सकें।

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इसी तरह 2022-23 के लिए प्राविधिक शिक्षा परिषद द्वारा डीफार्मा के लिए जारी संबद्धता का सत्यापन कराने की बात तय हुई। सत्यापन समितियों को बीफार्मा व डीफार्मा कोर्स शुरू करने के लिए संस्था स्तर पर पूरी की जाने वाली मुख्य शर्तें, निरीक्षण रिपोर्ट का प्रारूप व मॉडल भी उपलब्ध कराए गए हैं।

अपर मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को अपने स्तर से एक समिति गठित कर पूर्व में जारी निरीक्षण रिपोर्ट का सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। समिति में एक तहसीलदार, राजकीय इंटर कॉलेज के प्राचार्य व एक सहायक अभियंता शामिल होंगे। खास बात यह है कि तहसीलदार उस तहसील का नहीं होगा, जिस तहसील में संस्था है। शासन में रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई तय मानी जा रही है। इसे लेकर संस्थानों में खलबली मची हुई है।
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इन बिंदुओं पर सत्यापन
- भौतिक अवस्थापना, भूमि, भवन, क्लास रूम, लाइब्रेरी, छात्रावास, कंप्यूटर सेंटर।
- म्यूजियम, ऑडिटोरियम, स्टाफ के लिए सुविधाएं, प्रशासनिक कक्ष।
- मानव संसाधन, प्रधानाचार्य, शिक्षक, अनुभवी शिक्षक, गैर शैक्षणिक कर्मचारी।
- सीटों की संख्या के अनुसार संसाधन, शिक्षक व कर्मचारियों की उपलब्धता।

विशेषज्ञों की टीम करती है भौतिक सत्यापन
बीफार्मा की संबद्धता देने से पहले शासन एनओसी देती है। फिर पीसीआई जमीन के कागजात, नक्शा, बिल्डिंग की फोटो आदि के आधार पर भौतिक जांच कराकर मान्यता देती है। फिर विश्वविद्यालय स्तर पर उच्च शिक्षा विभाग, एक वरिष्ठ शिक्षक, एक विषय विशेषज्ञ, एक सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े व्यक्ति की टीम भौतिक निरीक्षण करती है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर संबद्धता मिलती है। वहीं, डीफार्मा के लिए पहले सभी आवश्यक कागजात पीसीआई में जमा होता है। पीसीआई के विशेषज्ञ स्थलीय निरीक्षण करते हैं। इसके बाद प्राविधिक शिक्षा परिषद की ओर से विभागीय अधिकारी, प्रधानाचार्य व शिक्षक की टीम भौतिक निरीक्षण करती है। इसकी रिपोर्ट पर परिषद संबद्धता देती है।

मैंने ही भेजा सत्यापन का प्रस्ताव
प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल का कहना है कि संबद्धता-एनओसी के पुनः भौतिक सत्यापन के लिए मैंने ही प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेजा था। सत्र 2022-23 में समय की कमी के कारण कॉलेजों से शपथ पत्र लेकर व जांच कराकर संबद्धता दी गई थी। इसमें कुछ मानक के अनुसार नहीं पाए गए, जिनकी संबद्धता रद्द करने के लिए पीसीआई को भी लिखा गया है। डीएम स्तर से जांच से कहीं कमी होगी तो पता चल जाएगा।

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