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बीफार्मा छात्रा को ट्रैक्टर-ट्रॉली ने रौंदा, तड़पता छोड़कर भाग निकला ड्राइवर

Wed, 22 Feb 2017 10:54 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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श‌िल्पी (फाइल फोटो)
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लखनऊ के सरोजनीनगर के बिजनौर स्थित आर्यकुल कॉलेज के पास मंगलवार सुबह ईंट लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने स्कूटी सवार बी-फार्मा की छात्रा शिल्पी रावत (21) को रौंद दिया। खून से लथपथ छात्रा को तड़पता देख ड्राइवर ट्रैक्टर-ट्रॉली छोड़कर मौके से भाग निकला।
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हादसे की जानकारी मिलते ही कॉलेज के छात्रों व राहगीरों का आक्रोश फूट पड़ा। 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग करते हुए बिजनौर चौराहा पर सड़क जाम कर हंगामा व प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने हटाने की कोशिश की तो छात्र उग्र होकर तोड़फोड़ व पथराव करने लगे। 

लाठीचार्ज कर छात्रों को खदेड़ा गया। करीब एक घंटे तक हंगामा और बवाल के चलते यातायात अव्यवस्थित हो गया। दोपहर बाद पुलिस ने ड्राइवर बंथरा के ठकुरईनखेड़ा निवासी सुनील सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
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इंस्पेक्टर ने बताया कि शिल्पी मोहनलालगंज के हरिकंशगढ़ी निवासी जीतराम की बड़ी बेटी थी और आर्यकुल कॉलेज फॉर्मेसी एंड रिसर्च से बी-फार्मा की पढ़ाई कर रही थी। जीतराम इलाके में ही क्लीनिक चलाते हैं। 

मंगलवार सुबह शिल्पी स्कूटी से कॉलेज जा रही थी। बिजनौर चौराहे पर सड़क पार करते वक्त मोहनलालगंज की तरफ से आ रही बेकाबू ट्रैक्टर-ट्राली ने उसकी स्कूटी में जोरदार टक्कर मार दी। शिल्पी उछलकर दूर गिरी और ट्रैक्टर-ट्राली ने उसे रौंद दिया। छात्रा को खून से लथपथ तड़पते देख ट्रैक्टर-ट्राली चालक के होश उड़ गए। 

वाहन छोड़कर वह भाग निकला। हादसे की सूचना कॉलेज पहुंची तो सैकड़ों छात्र मौके पर आ गए। शिल्पी को ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया जहां उसने दम तोड़ दिया। कॉलेज प्रशासन ने शिल्पी के परिवारीजनों को हादसे की जानकारी दी तो कोहराम मच गया।
 
सड़क पर गम और गुस्से का इजहार करते कुछ छात्रों ने पथराव व तोड़फोड़ शुरू कर दी। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने लाठीचार्ज किया। लाठीचार्ज व भगदड़ में कई छात्रों को चोटें आई हैं। इंस्पेक्टर ने बताया कि जीतराम की तरफ से अज्ञात ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। ट्रैक्टर-ट्राली चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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‘पुलिस ने न कुछ सुना न समझा और चला दी लाठियां’

मौके पर मौजूद पुल‌िस फोर्स
छात्रों ने सरोजनीनगर पुलिस पर दादागिरी का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना था कि वह मुआवजे और ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे, तभी इंस्पेक्टर सुधाकर पांडेय मौके पर आ गए और बिना कुछ कहे-सुने लाठीचार्ज का आदेश दे दिया।
 
छात्र पुलिस के जरिए अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाना चाहते थे लेकिन इंस्पेक्टर ने अराजकता मचा दी। पुलिस के रवैये से गुस्साए छात्रों ने भी तोड़फोड़ और पथराव किया। छात्रों का कहना है कि अगर पुलिस छात्रों से बात करती तो हंगामा न होता।

अधूरा रह गया डॉक्टर बनने का सपना
चाचा अवधराम ने बताया कि शिल्पी परिवार के सभी बच्चों में सबसे ज्यादा होशियार थी। वह पढ़ाई के साथ-साथ घर के काम में भी महिर थी। उसका सपना था कि वह डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करे। 

उसके पिता जीतराम इलाके में क्लीनिक चलाते हैं। वह पिता से कहती थी कि डॉक्टर होने के बाद क्लीनिक वही संभालेगी। ...लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। शिल्पी का डॉक्टर बनाने का सपना अधूरा रह गया। 

उधर, शिल्पी की मौत की खबर सुनकर घर में कोहराम मच गया। मां कलावती व छोटी बहन सपना का रो-रोकर बुरा हाल था। मां व बहन को शव के पास बिलखता देख वहां मौजूद लोगों की आंखे नम हो गई थीं। 
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