उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पाकिस्तान दौरे की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अचानक वहां जाकर मास्टर स्ट्रोक खेला था। जबकि, पठानकोट में हुए आतंकी हमले की जितनी भी निंदा की जाए वह कम है।
पाकिस्तान के कट्टरपंथी नहीं चाहते हैं कि दोनों देशों के रिश्ते बेहतर हों। नवाज शरीफ को चाहिए कि वह हमला करवाने वालों का पता लगाकर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।
पूर्व राज्यपाल मंगलवार को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में यदि कोई शर्म व लिहाज होती तो पठानकोट जैसी घटना ही न घटती। जबकि, वहां का आम नागरिक भी भारत से अच्छे रिश्ते चाहता है। लेकिन वहां की कट्टरपंथी ताकतें ऐसा नहीं होने देना चाहती हैं।
यूपी के डीजीपी स्वच्छ व ईमानदार छवि के
पूर्व राज्यपाल ने कहा कि यूपी के नए डीजीपी जावीद अहमद स्वच्छ व इमानदार छवि के हैं। उनका रिकॉर्ड साफ है। उनका जो लोग विरोध कर रहे हैं वे दिमागी दिवालिया हैं।
जावीद को डीजीपी बनाने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश को मैं धन्यवाद देना चाहता हूं।
सबसे शानदार राज्यपाल हैं नाईक
अजीज कुरैशी ने कहा कि यूपी के राज्यपाल राम नाईक बेहद शानदार राज्यपाल हैं। वे बहुत ही वरिष्ठ नेता हैं। उनकी छवि भी एकदम साफ है। सपा सरकार के कुछ लोग उनका विरोध क्यों करते हैं, यह तो वे ही जानें।
उर्दू की अनिवार्यता खत्म हुई तो कड़ा विरोध
अजीज कुरैशी ने लखनऊ के ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती विश्वविद्यालय में उर्दू भाषा की अनिवार्यता खत्म किए जाने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने एक बैठक कर इसे समाप्त करने का निर्णय लिया है।
अब यहां पर केवल अरबी व फारसी भाषा ही पढ़ाई जाएगी। कुरैशी ने कहा कि इस निर्णय का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। इसके लिए धरना-प्रदर्शन से लेकर भूख हड़ताल तक किया जाएगा।
पहले चरण में कुलपति व सरकार को पत्र लिखकर इस निर्णय को वापस लेने की मांग की जाएगी, लेकिन मांग नहीं मानी गई तो इसका और कड़ा विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उर्दू ही भारत की अपनी बुनियादी जुबान है।
इसको खत्म करने की जो भी लोग कोशिश कर रहे हैं उनका जीना हराम कर दिया जाएगा। इसे किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जब वे यूपी के राज्यपाल थे तब भी इस विश्वविद्यालय की काफी शिकायतें मिलती थीं।
विवि ने उर्दू की अनिवार्यता खत्म करने से किया इन्कार
ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती उर्दू अरबी फारसी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. खान मसूद अहमद ने उर्दू की अनिवार्यता खत्म किए जाने संबंधी खबर से इन्कार कर दिया है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में अभी एकेडमिक काउंसिल ही नहीं बनी है। कार्य परिषद की भी अभी तक पहली बैठक नहीं हुई है। ऐसे में इस तरह के बड़े फैसले होने का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने कहा कि जिन नियमों के तहत विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी, वही नियम आज भी चल रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि यह मामला सिर्फ अनिवार्य विषय उर्दू के नंबरों को कुल अंकों में जोड़ने का है।
दरअसल, उर्दू को यहां अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जरूर जाता है, लेकिन उसके नंबर जोड़े नहीं जाते हैं। यही व्यवस्था अलीगढ़ व जामिया विश्वविद्यालय में भी है।