प्रदेश के मनोनीत राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने सोमवार को प्रदेश के राज्यपाल पद की शपथ ग्रहण की। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ ने डॉ. कुरैशी को शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण करने के बाद डॉ. कुरैशी ने प्रदेश का राज्यपाल मनोनीत किए जाने के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व गृहमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करेंगे।
राजभवन के गांधी सभागार में आज शाम आयोजित संक्षिप्त समारोह में सबसे पहले मुख्य सचिव आलोक रंजन ने डॉ. कुरैशी को यूपी का राज्यपाल मनोनीत किए जाने संबंधी अधिसूचना पढ़कर सुनाई। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें शपथ ग्रहण कराई।
मुख्यमंत्री भी थे मौजूद
पूरा समारोह महज दो-तीन मिनट में संपन्न हो गया। शपथ ग्रहण के मौके पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, नगर विकास मंत्री मो. आजम खां समेत कई मंत्री, डीजीपी ए.एल. बनर्जी, सहित शासन के कई आला अधिकारी व अन्य लोग मौजूद थे।
शपथ ग्रहण के बाद पत्रकारों से रू-ब-रू डॉ. कुरैशी ने कहा कि यूपी का प्रभार दिए जाने के लिए वह राष्ट्रपति व केंद्र सरकार के आभारी हैं।
प्रदेश के हालात के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। इस बारे में पता करेंगे। उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया।
यूपी का अतिरिक्त प्रभार
बीएल जोशी की विदाई के कुछ ही घंटे बाद यूपी के नवमनोनीत राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी लखनऊ पहुंचे और शाम को राजभवन में शपथ ग्रहण करने के साथ ही उन्होंने पदभार संभाल लिया।
बताते चलें कि डॉ. कुरैशी इस समय उत्तराखंड के राज्यपाल हैं और जोशी के इस्तीफे के बाद उन्हें यूपी के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
लखनऊ पहुंचने पर मुख्यमंत्री व शासन के आला अधिकारियों ने डॉ. कुरैशी की आगवानी की।
बीएल जोशी के इस्तीफे के बाद डॉ. कुरैशी को प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। देखना दिलचस्प होगा कि यह जिम्मेदारी कब तक उनके पास रहती है।
अभी भी जारी है तलाश
साफ है कि जब तक केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार यूपी के लिए किसी राज्यपाल की तलाश नहीं कर लेती तब तक डा. कुरैशी के पास ही यूपी का भी चार्ज रहेगा।
जोशी यूपीए सरकार द्वारा राज्यपाल नामित किए गए थे और कांग्रेस के नेतृत्ववाली केंद्र सरकार को सपा और बसपा दोनों का समर्थन प्राप्त था लिहाजा उनके कार्यकाल में मायावती और अखिलेश सरकार से उनके रिश्ते मधुर बने रहे।
बहरहाल, अब देखना होगा कि मोदी सरकार किसे राज्यपाल बनाती है और उससे प्रदेश की सपा सरकार से रिश्ते किस तरह के रहते हैं।