उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री आजम खां और राज्यपाल राम नाईक के बीच चल रहा विवाद और बढ़ गया है। आजम खां ने राज्यपाल चार पृष्ठों का एक पत्र लिखा है। जानिए, उस पत्र में खास क्या है?
राज्यपाल राम नाईक को संबोधित करते हुए अखिलेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री आजम खां लिखते हैं कि इधर आपकी मेरे प्रति व्यक्तिगत नाराजगी की खबरें समाचार पत्रों से मुझे मिलती रहती हैं। ये जानकार कष्ट होता है कि आप जैसे वरिष्ठ राजनीतिज्ञ की मेरे बारे में ऐसी गलत धारणा क्यों हैं? जबकि मैने हमेशा कोशिश की है कि राजनीति के दलदल में रहकर भी अपने आप को पूरी तरह से पाक-साफ रखूं।
शायद आपको याद भी होगा कि आप एक बार रामपुर के रजा लाइब्रेरी की मीटिंग में आए थे। मैं आपको रिसीव करने के लिए एयरपोर्ट गया था। मेरे लिए आप उस समय भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री नहीं बल्कि एक निष्पक्ष महामहिम की हैसियत रखते थे।
समाचार पत्रों में ही छपी खबरों से मुझे मालूम हुआ है कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर शोध संस्थान की इमारत को मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को देने पर आपके द्वारा आपत्ति व्यक्त की गई है।
यहां मैं ये बताता चलूं कि रामपुर शहर में जब रियासत का दौर था नवाब एकमात्र हुक्मरान हुआ करते थे तब उस वक्त शाही फरमान था कि कोई आठवें दर्जे से अधिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकेगा। जिन सड़कों पर नवाब की मोटर गुजरती हो उस पर आम जनता को चलने का अधिकार नहीं होगा। मात्र एक मोटर केवल नवाब की निकल सके इसके लिए तंग दरवाजे बनाए गए थे। कोई बिजली का कनेक्शन नहीं ले सकता था सिवा उनके जो नवाब के शाही दस्तरख्वान में बैठकर भोजन कर सकते हैं।
आगे लिखते हैं
आजम खां आगे लिखते हैं कि लखनऊ से गई एक नर्तकी को सिर्फ इसलिए दफन कर दिया गया कि वह अपना शरीर देने के लिए राजी नहीं थी। कोई पक्का मकान नहीं बना सकता था सिवाय उनके जिनसे नवाब को पारिवारिक रिश्ते हों। यदि आपको जानकारी लेना हो Freedom At Midnight नाम की पुस्तक का वह भाग अवश्य पढ़ने का कष्ट करें जिसमें हम गरीबों पर नवाबों द्वारा किए गए जुल्म की दास्तां दर्ज है।
रामपुर रियासत के दौर में नर्क से भी बदतर था। न सड़के थीं, न पानी था न शिक्षा का प्रबंध और न जीने के साधन। फिर देश आजाद हुआ और आजादी के गद्दारों ने सफेद टोपी ओढ़ ली। नवाब परिवार संसद और विधानसभा में भी गरीब और लाचार जनता का प्रतिनिधित्व करने लगा। जबकि दूसरी ओर रामपुर के लोगों का हाल यह था कि बीड़ी बनाकर और रिक्शा चलाकर लगभग आजादी के पचास सालों के बाद तक नर्क की जिंदगी गुजारते रहे।
आजम ने बया किया दुख
आजम लिखते हैं कि 27 जनवरी 2015 को लखनऊ राजभवन में रजा लाइब्रेरी की मीटिंग में महामहिम के द्वारा लाइब्रेरी पर कम परंतु मुझ पर ज्यादा कटाक्ष किए गए। जो हम गरीबों की बर्बादी के जिम्मेदार हैं उन्हें विशेष आमंत्रण देकर बुलाया गया। मीटिंग में मुझे यहां तक कि सदस्यों को हस्तक्षेप करते हुए कहना पड़ा कि मीटिंग राजनीतिक लक्ष्य के लिए नहीं बल्कि लाइब्रेरी के लिए बुलाई गई है। इस मीटिंग में महामहिम द्वारा ऐसी बातें कही गई तो तथ्यों से परे थीं।
महामहिम आपके सम्मान का सम्मान करना मेरा संवेधानिक दायित्व है। महामहिम द्वारा अयोध्या विवाद पर की गई टिप्पणी और राम मंदिर पर किए गए इजहारे ख्याल पर मेरा बोलना स्वाभाविक था। क्योंकि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मसजिद का शहीद कर दिया जाना संविधान और कानून का खुला उल्लंघन था।
तब संख्या बल का सहारा लेकर अराजक भीड़ ने आजाद भारत के माथे पर कलंक लगाया था। भारत की अदालत ने उप्र के तत्कालिक मुख्यमंत्री को दायित्वा का निर्वाहन न कर पाने के लिए एक दिन की सजा सुनाई थी।
सदमा लगा था मुझे
इस घटना से हर इंसाफ पसंद भारतीय और कानून में आस्था रखने वालों को सदमा पहुंचा था। मैं भी उनमें से एक हूं और भारतीय मुसलमान हूं। आपकी टिप्पणी राजनीति से प्रेरित थी और देश के अल्पसंख्यकों को कष्ट देने वाली थी। मेरा संबंध एक राजनीतिक दल से है और आवश्यक है कि मै आप द्वारा यदि सरकार और पार्टी के लिए घातक टिप्पणी की जाती तो उसका बचाव करूं।
महामहिम बड़े सम्मान और आदर के साथ अर्ज करना चाहता हूं कि मेरा उत्तर आपको या भाजपा के अन्य नेताओं को अच्छा नहीं लगा। किंतु भारत सरकार की एक महिला मंत्री द्वारा कही गई एक ऐसी बात जो निसंदेह बहुत ही शर्मनाक थी उसका कोई संज्ञान नहीं लिया गया। महामहिम मोहतरमा साध्वी साहिबा ने क्या कहा यह आपने भी नहीं देखा।
ऐसे हालत में यदि मैने कहा कि आपका स्थान बहुत ऊंचा है और राजनीतिक विवादों में आना आपकी पद के गरिमा के अनुरूप प्रतीत नहीं होता तो मैं नहीं समझता कि मैं इसमें गलत हूं। महामहिम की सेवा में कहना चाहता हूं कि मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूं और रामपुर शहर के मोहल्ला घेर मीर बाज खां की एक ऐसी तंग गली में रहता हूं जहां मोटर चली जाए तो लौट नहीं पाएगी।
और यह मेरा जीवन
मुझे सरकार द्वारा विधायक बनने के बाद एक इमारत जिसमें कभी नवाब रामपुर के बड़े बेटे रहा करते थे, जो बहुत खस्ता हालत में थी और जिसका अधिकतर हिस्सा जमींदोज हो चुका था मात्र 100 रुपए महीने पर एलॉट कर दी गई लेकिन मैने कभी भी इस इमारत को अपने जाती आराम के लिए इस्तेमाल करने का इरादा तक नहीं किया।
इस इमारत में मेरे द्वारा पार्टी का कार्यालय बना दिया गया। बाद के सालों में मैने जनता से झोली फैलाकर चंदा मांगा और इस इमारत को आलीशान बना दिया। अतः पिछले साल से इसमें रामपुर पब्लिक स्कूल के नाम से बालिकाओं का सीबीएसई बोर्ड की मान्यता की चाहत में स्कूल खोल दिया गया।
इस स्कूल में मात्र 450 फीस है। जो लड़कियां अनाथ हैं उनकी फीस माफ है। महामहिम, मैने इस शहर के माथे से गुलामी, लाचारी, भुखमरी और जेहालत के कलंक को मिटाने का संकल्प लिया है।
इसलिए चर्चा में आई ईमारत
आजम खां लिखते हैं कि इसलिए जिस इमारत को आपने आपने अपनी नाराजगी का बिंदु बनाया है। उसका संक्षिप्त इतिहास है कि यह इमारत गत समाजवादी सरकार में बनाई गई थी ताकि मौलाना मोहम्मद अली जौहर के जीवन पर शोध हो सके। इस स्कीम को गत बसपा सरकार ने समाप्त कर दिया था।
इमारत खाली पड़ी थी उस पर नाजायज कब्जे होने लगे थे लिहाजा रामपुर पब्लिक स्कूल के बालकों की शाखा को बनाने के लिए उप्र सरकार ने इसे ट्रस्ट को दे दिया है। ना कि मुझे या मेरे व्यक्तिगत उपयोग के लिए।
महामहिम मैं तो गली के मकान में आज भी संतुष्ट हूं। मैं नहीं समझता कि यदि इस दर्दनाक स्थिति में जी रहे बच्चों को मेरे द्वारा जीने और देश की सेवा कर सकने के काबिल बनाने की कोशिश की गई है तो इसमें कुछ गलत है।
मुसलमानों में भय पैदा होता है
मान्यवर आपकी आए दिन की नाराजगी भरी टिप्पणियां और मेरे बारे में जाहिर की जाने वाली बिपरीत राय से कमजोर और अल्पसंख्यक समाज में विशेष रूप से मुसलमानों में काफी भय पैदा हो रहा है। और उनका मानना है कि मुझे तथा मुसलिम समाज को आपकी नाराजगी से बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।
तथा वे उन ताकतों के निशाने पर आ सकते हैं जो कभी उन्हें पाकिस्तान भेजने की बात कहते हैं या कभी पिल्ला जैसे अमर्यादित शब्दों से नवाजते हैं। रामपुर पब्लिक स्कूल के पहले वार्षिक समारोह में मैने घोषणा की है कि मेरे द्वारा उप्र में ऐसी सभी अनुपयोगी इमारतों को जो जर्जर हालत में भी हो तब भी उन्हें गरीबों को सस्ती से सस्ती शिक्षा प्रदान करने के लिए ऐसी संस्थाओं या ट्रस्ट को दे दिया जाए जो शिक्षा के लिए समर्पित हों।
आपका सहयोग चाहिए
आजम खां कहते हैं कि महामहिम इसमें मुझे आपका सहयोग चाहिए। यहां आपके संज्ञान के लिए यह बताना भी जरूरी है कि उक्त इमारत सभी कानूनी औपचारिकताएं पूर्ण करने के बाद ही मिल सकी है। महामहिम मेरा आग्रह है कि मैं बहुत ही कमजोर व्यक्ति हूं तथा पद और गरिमा में भी बहुत छोटा हूं।
मुझे तथा मेरे कमजोर लाचार समाज को आपकी नाराजगी का बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है। ऐसी ताकतें जो हमसे घृणा का रिश्ता रखत हैं उनको बहुत बल मिल जाएगा इसलिए बहुत भारी मन से यह तहरीर आपको भेज रहा हूं।
आशा करता हूं आप कमजोरों को शिक्षा दिए जाने का विरोध नहीं करेंगे तथा रामपुर के जालिम नवाबों के भी अनुचित पैरवी नहीं करेंगे। शुक्रिया
सादर
मों आजम खां
कैबिनेट मंत्री, उप्र शासन
क्या था विवाद
सूबे के मंत्री आजम खां और राम नाईक के बीच विवाद की वजह मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट था। इस ट्रस्ट को 100 रुपए की सालाना लीज पर आजम खां को देने पर राम नाईक ने आपत्ति दर्ज कराई थी।
राम नाईक ने कहा था कि एक मंत्री के ट्रस्ट को कीमती जमीन देने पर मैं खुद सरकार से जानकारी लूंगा। राज्यपाल ने कहा था कि इस तरह सरकारी जमीन दिए जाने पर ऑडिटर जनरल जांच करते हैं। जिस ट्रस्ट को जमीन दी गई है, वह सक्षम है या नहीं? इसकी रिपोर्ट भी ऑडिटर जनरल विधानसभा के सामने रखते हैं।
विधानसभा की जिम्मेदारी है कि इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करे। मैं खुद इस मामले की जानकारी ले रहा हूं कि किन परिस्थितियों में यह जमीन मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को दी गई।
गौरतलब है कि आजम खां के मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को महज 100 रुपये के सालाना लीज रेंट पर रामपुर स्थित मौलाना
मुहम्मद अली जौहर शोध संस्थान दिया जाएगा। राज्य सरकार यह लीज 30 वर्षों के लिए देने जा रही है। बताया जा रहा है कि खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लीज रेंट के प्रस्ताव को हरी झंडी दी है।
इसके बाद सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री आजम खान के बयान पर टिप्पणी करने को राज्यपाल रामनाईक ने गरिमा के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि आजम खान का इलाज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा मुखिया मुलायम सिंह ही करें।